
मैदान पर धैर्य और साहस की मिसाल रहे चेतेश्वर पुजारा... टेस्ट में खेलीं कई यादगार इनिंग्स
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पुजारा की खासियत थी धैर्य, साहस और दबाव सहने की क्षमता, जिससे वे अक्सर अकेले ही पारी को संभाले रखते थे. उनके योगदान, खासकर ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका के खिलाफ भारत के यादगार टेस्ट मुकाबलों में निर्णायक साबित हुए हैं.
टेस्ट क्रिकेट का जिक्र हो और चेतेश्वर पुजारा का नाम ना आए ऐसा हो नहीं सकता. एक दशक से भी ज्यादा समय तक चेतेश्वर पुजारा तीसरे नंबर पर भारत के लिए मजबूत नींव रहे हैं और अक्सर टीम को मुश्किलों से उबारते रहे. 2010 में टेस्ट डेब्यू से लेकर अपने करियर के आखिर तक पुजारा ने कई अहम पारियां खेली और काफी बार टीम को कठिन हालात में सहारा दिया. चेतेश्वर पुजारा को उनके धैर्यपूर्ण खेल, लंबी पारियों और भारतीय टेस्ट टीम को मुश्किल हालात से निकालने की क्षमता के लिए "भारत की नई दीवार" कहा गया. आइए नजर डालते हैं उनकी ऐसी ही पारियों पर...
72 बनाम ऑस्ट्रेलिया, बेंगलुरु 2010
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु में पुजारा की डेब्यू पारी सिर्फ तीन गेंद में ही समाप्त हो गई, लेकिन दूसरी पारी में जब भारत 207 रन का पीछा कर रहा था, तब 22 वर्षीय खिलाड़ी ने अपना कमाल दिखाया. नंबर तीन पर पुजारा को राहुल द्रविड़ से आगे भेजा गया. पुजारा ने मुश्किल परिस्थितियों में 89 गेंदों पर 72 रनों की पारी खेली. पहली पारी में पुजारा को मिचेल जॉनसन ने आउट किया था, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को पस्त कर दिया. पुजारा जब आउट हुए, तब भारत लक्ष्य से सिर्फ 61 रन दूर था.
जोहानिसबर्ग में दूसरी पारी में शतक, 2013
पुजारा ने जोहानिसबर्ग की पिच पर अपना जलवा दिखाते हुए डेल स्टेन, मोर्ने मोर्केल और वर्नोन फिलेंडर जैसे बेहतरीन साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों का सामना करके दूसरी पारी में शतक जड़ा. इस दौरान पुजारा ने मुरली विजय के साथ 70 रनों की साझेदारी की और इसके बाद विराट कोहली के साथ मिलकर उन्होंने 222 रनों की साझेदारी की. पुजारा ने 21 चौके की मदद से 270 गेंदों में 153 रनों की दमदार पारी खेली. भारत ने साउथ अफ्रीका के सामने 458 रनों का लक्ष्य दिया और मैच ड्रॅा पर समाप्त हुआ.
202 बनाम ऑस्ट्रेलिया, रांची 2017

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