
महमूदाबाद की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए पर क्या प्रोफेसर इन बातों का जवाब देंगे?
AajTak
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद जितनी शिद्दत से युद्ध की मुखालफत करते हैं, काश उतनी ही शिद्दत से आतंकवाद और जिहाद का आप विरोध करते. यह सही है कि युद्ध हमेशा बुरा होता है, पर जब आतंकवाद को खत्म करने के लिए युद्ध हो तो वह हमेशा सही ही होता है.
अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी पर बवाल मचा हुआ है. लखनऊ के एक जाने माने रजवाड़ा परिवार से रिश्ता रखने वाले प्रोफेसर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं. दरअसल इनकी गिरफ्तारी कई कारणों से लोगों को गैर वाजिब लगती है. क्योंकि उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से अपनी पोस्ट में कोई भी शब्द ऐसा नहीं लिखा है जो गैरकानूनी हो. यहां तक कि बीजेपी के भी कुछ नेताओं को महमूदाबाद की गिरफ्तारी नहीं पच रही है. पर महमूदााद ने अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे तीर चलाएं हैं जो बहुत मारक हैं. इस तरह देखा जाए तो वो सड़क पर पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले अनपढ़ लोगों से अधिक खतरनाक बन जाते हैं. क्योंकि वो उस विचारधारा के पोषक बन जाते हैं जो युद्धकाल में भी भारतीय सेना और भारत की चुनी हुई सरकार की कट्टर विरोधी है.
फेसबुक पर ऑर्टिकल लिखते हुए वही नीति अपनाई है जो भारत की आजादी के पहले कोई लेखक कलम चलाते हुए अंग्रेजी राज के खिलाफ न बोलते हुए भी सारी दुर्दशा का जिम्मेदार उन्हें ठहरा देता था. यह इस तरीके से किया जाता था कि अंग्रेजों के खिलाफ नफरत भी पैदा हो जाए और वो कानून से साफ साफ बच भी निकलें. यही कारण है कि महमूदाबाद से बहुसंख्यक हिंदू समुदाय में बहुत नाराजगी है. आइये पहले देखते हैं कि वो कौन से कारण हैं जिसके चलते लगता है कि प्रोफेसर अली खान निर्दोष हैं उन्हे जानबूझकर फंसाया गया है. उसके बाद चर्चा करते हैं कि वो कौन से कारण हैं जिनके चलते उनकी गिरफ्तारी सही लगती है.
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन
अली खान की पोस्ट में कर्नल सोफिया कुरैशी की प्रेस ब्रीफिंग को भारत की विविधता का प्रतीक बताया गया और सामाजिक न्याय के लिए सवाल उठाए गए हैं. उन्होंने लिखा कि हिंदुत्ववादियों की प्रशंसा तभी सार्थक है, जब यह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भीड़ हिंसा और अवैध बुलडोजिंग जैसे मुद्दों को संबोधित करे. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि यह पोस्ट एक सामान्य सामाजिक टिप्पणी थी, जिसमें कुछ भी आपराधिक या सांप्रदायिक नहीं था.
यही कारण है कि अशोका विश्वविद्यालय की फैकल्टी और 1,100 से अधिक शिक्षाविदों, लेखकों, और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए कहा कि यह गिरफ्तारी निराधार और असहनीय है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है.
2. कमजोर कानूनी आधार

Guna Hawala Scandal: गुना का हाईप्रोफाइल हवाला कांड अब एक नई करवट ले रहा है. जहां एक तरफ ट्रेनी IPS आयुष जाखड़ की जांच टीम गुजरात के व्यापारी को बयान के लिए बुला रही है, वहीं दूसरी तरफ निवर्तमान एसपी अंकित सोनी के तबादले ने शहर में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. 'लेडी सिंघम' हितिका वासल ने कमान संभाल ली है, लेकिन अंकित सोनी के समर्थन में हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए हैं.

इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है, इस युद्ध के चलते भारत में भी ऊर्जा संकट पैदा हो रहा था, इसी संकट को लेकर पीएम मोदी ने आज संसद में पहली बार सार्वजनिक तौर पर बयान दिया. पश्चिम एशिया में जंग के हालातों पर पीएम मोदी ने लोकसभा में 25 मिनट की स्पीच दी उन्होंने कहा कि तनाव खत्म होना चाहिए. बातचीत से ही समस्या का समाधान है. पीएम ने कहा कि नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं. होमुर्ज का रास्ता रोकना स्वीकार नहीं होगा ‘सरकार की कोशिश है कि देश में तेल-गैस संकट न हो. इसके लिए 27 की जगह अब 41 देशों से इंपोर्ट कर रहे हैं. पश्चिम एशिया में एक करोड़ भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है.

हैदराबाद में आगामी रामनवमी शोभा यात्रा को लेकर गोशामहल के विधायक टी. राजा सिंह ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि साल 2010 से लगातार शोभा यात्रा आयोजित की जा रही है, लेकिन हर साल पुलिस की ओर से बाधाएं खड़ी की जाती हैं. उनका आरोप है कि सिदंबर बाजार, पुराना पुल और बेगम बाजार जैसे इलाकों में विशेष रूप से लाठीचार्ज के लिए टास्क फोर्स तैनात की जाती है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि हर साल उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाती है और इस बार भी पुलिस अपनी गलतियों का ठीकरा उन पर फोड़ सकती है.










