
भारत में चीनी निवेश को ढील, क्या है छह साल बाद बदलाव की वजह?
BBC
छह साल पहले गलवान में हुई सैन्य झड़प के बाद चीनी निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना मुश्किल हो गया था. अब सरकार की नीति बदल रही है. क्या भारत को इससे फ़ायदा होगा?
भारत ने मंगलवार को चुनिंदा क्षेत्रों में चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में ढील देने को मंज़ूरी दे दी.
सरकार ने कहा कि इसका मक़सद पूंजी की कमी को घटाना है और छह साल के तनाव के बाद आर्थिक संबंधों में नए सिरे से शुरुआत करना है.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापारिक नीतियों और मध्य पूर्व में जंग के कारण बढ़ी अनिश्चितता ने हालात को और नाज़ुक बना दिया है.
शायद इसी वजह से छह साल के ठंडेपन के बाद भारत और चीन के बीच सरगर्मी बढ़ी है. साल 2020 में भारत ने चीनी कंपनियों के भारत में निवेश से जुड़े नियम कड़े कर दिए थे.
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दरअसल जून 2020 में भारत और चीन की सेना के बीच लद्दाख के गलवान में हुई हिंसक झड़प हुई थी. इस झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध काफ़ी ख़राब हो गए थे.
इसके बाद से भारतीय कंपनियों में चीनी निवेशकों के लिए भारत के गृह और विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों वाले एक पैनल से सुरक्षा मंज़ूरी लेना ज़रूरी कर दिया गया.













