
जब कश्मीर मुद्दे पर ईरान ने दिया था भारत का साथ, लेकिन क्या दोनों देशों के संबंध दोस्ताना रहे हैं?
BBC
भारत की आज़ादी के बाद से अब तक ईरान के साथ उसके संबंधों में कई चढ़ाव-उतार देखे गए. इसराइल-अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद भारत के रुख़ ने ईरान से साथ उसके संबंधों पर चर्चा छेड़ दी है. जानिए अब तक दोनों देशों के संबंध कैसे रहे हैं?
"भारत और ईरान नए दोस्त नहीं हैं. हमारी दोस्ती उतनी ही पुरानी है जितना कि इतिहास. सदियों से हमारे समाज, कला और आर्किटेक्चर, विचार और परंपराओं, संस्कृति और व्यापार के माध्यम से जुड़े हुए हैं."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में अपनी ईरान यात्रा के दौरान यह बयान देते हुए भारत और ईरान के संबंधों की गहराई के बारे में बात की थी.
वैसे अगर देखा जाए तो भारत की स्वतंत्रता के बाद दोनों देशों के संबंधों में कई अहम पड़ाव आए हैं.
मध्य-पूर्व की लगातार बदलती परिस्थितियाँ, पाकिस्तान के साथ संबंध, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अमेरिका-रूस-चीन जैसे देशों का प्रभाव और ईरान के आंतरिक हालात, इन सभी ने पिछले सात-आठ दशकों में भारत और ईरान के संबंधों को प्रभावित किया है.
ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हालिया हमलों और आयतुल्लाह ख़ामेनेई की मौत के बाद भारत ने खुले तौर पर ईरान पर हुए हमलों की निंदा नहीं की.
ऐसे में जानकार भारत-ईरान के संबंधों का हवाला देकर भारत सरकार के इस रुख पर सवाल उठा रहे हैं.
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