
'तो महिलाओं को कोई भी नौकरी नहीं देगा', पीरियड्स लीव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?
BBC
विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स लीव महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के साथ-साथ वर्किंग प्लेस की उत्पादकता और दक्षता को भी बढ़ा सकती हैं.
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए पीरियड्स लीव की मांग वाली एक याचिका खारिज़ कर दी है.
जजों ने कहा कि अगर ऐसा क़ानून बनाया गया तो "कोई भी महिलाओं को नौकरी पर रखने से हिचकेगा."
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली दो जजों की बेंच ने कहा कि अनिवार्य छुट्टी देने से युवा महिलाओं को ये महसूस हो सकता है कि वो अपने पुरुष सहकर्मियों के बराबर नहीं हैं. ये उनके प्रोफ़ेशनल तरक्क़ी के लिए नुक़सानदेह हो सकता है.
भारत में पीरियड्स लीव के मुद्दे पर समाज में ध्रुवीकरण जैसी स्थिति रही है.
कुछ लोग अदालत की राय से सहमत हैं और कुछ का कहना है कि पीरियड्स के मुश्किल भरे दौर में एक-दो दिन की छुट्टी महिलाओं के लिए मददगार हो सकती है.
कुछ राज्यों और कई बड़ी निजी कंपनियों ने पहले ही महिला कर्मचारियों को पीरियड्स लीव देना शुरू कर दिया है.













