
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश का ये गाँव क्यों चर्चा में
BBC
बताया जाता है कि आयतुल्लाह ख़ुमैनी के परदादा सैयद अहमद मुसावी 'हिंदी' का जन्म 19वीं सदी की शुरुआत में बाराबंकी के किंतूर गाँव में हुआ था. सन 1834 के आसपास वह अवध के तत्कालीन नवाब के साथ ज़ियारत (दर्शन) के लिए ईरान गए थे और वहीं पर बस गए.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले का एक गाँव आजकल चर्चा में है. राजधानी लखनऊ से फ़ैज़ाबाद हाइवे पर सफ़दरगंज से मुड़ने के बाद कुछ किलोमीटर की दूरी पर 'किंतूर' गाँव है.
रमज़ान का महीना होने की वजह से यहाँ इक्का-दुक्का लोग ही बाहर दिखाई देते हैं.
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की इसराइल और अमेरिका के हमले में मौत के बाद इस गाँव की चर्चा होने लगी है.
ये दावा किया जाता है कि ईरान के पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुहोल्लाह मुसावी ख़ुमैनी के पूर्वज इस गाँव में रहा करते थे.
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इस गाँव में पहले शिया सादात (सैयद) की बड़ी आबादी थी.
यहाँ के रहने वाले और ख़ुमैनी के वंशज होने का दावा करने वाले निहाल काज़मी कहते हैं, "इस गाँव में तकरीबन 500 घर शिया समुदाय के थे. लेकिन लोगों ने पलायन किया और अब सिर्फ़ चार घर बचे हैं."













