
भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने दी 'इच्छा मृत्यु' की इजाज़त, हरीश राणा के पिता ने क्या कहा?
BBC
अदालत ने एम्स को एक ख़ास योजना बनाने को कहा है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सकते कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज़ की गरिमा और सम्मान बना रहे.
भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है.
कोर्ट ने 13 साल से ज़्यादा समय से कोमा में 32 साल के हरीश राणा का लाइफ़ सपोर्ट (जीवनरक्षक मशीनें) हटाने की मंज़ूरी दे दी है.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले पर फै़सला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव यूथेनेशिया पर व्यापक क़ानून बनाने पर विचार करने को भी कहा है.
कोर्ट ने एम्स-दिल्ली को यह भी निर्देश दिया है कि लाइफ़ सपोर्ट हटाने के लिए एक ख़ास योजना तैयार की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज़ की गरिमा और सम्मान बना रहे.
हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है.
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उन्होंने कहा कि वो मानवीय निर्देशों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आभारी हैं.













