
भारत के खिलाफ अपनी 'साजिश' में Britain और united states को भी शामिल करना चाहते थे ट्रूडो, लेकिन लगा झटका
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भारत पर संगीन आरोप लगाने वाले कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने बयान देने से पहले अमेरिका और ब्रिटेन से भी बात की थी. उन्होंने दोनों देशों से अपील की थी कि वह निज्जर की हत्या के मामले में भारत की निंदा करें. लेकिन दोनों ही देशों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या में भारत का नाम घसीटने वाले कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो अमेरिका और ब्रिटेन को भी अपनी 'साजिश' का हिस्सा बनाना चाहते थे. लेकिन इस कोशिश में उन्हें बड़ा झटका लगा और दोनों ही देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया. अमेरिकी मीडिया आउटलेट वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है.
ट्रूडो ने अमेरिका (United States) और ब्रिटेन (Britain) को अपने पक्ष में करने की काफी कोशिशें कीं. कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने खुद यह बात स्वीकार की. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि जस्टिन ट्रूडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक के सामने इस मामले को उठाया. अब अमेरिकी अखबार ने दावा किया है कि ट्रूडो की यह कोशिश बुरी तरह से फेल हो गई. कनाडा ने अमेरिका समेत अपने करीबी देशों से इस मामले में भारत की निंदा करने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया.
भारत से रिश्ते खराब नहीं करना चाहता है US
भारत, अमेरिका और कनाडा के संबंधों पर बारीकी से नजर रखने वाले विल्सन सेंटर के दक्षिण एशिया विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने अमेरिका के रुख पर अपनी राय जाहिर की है. उन्होंने कहा है कि ट्रूडो की बचकानी हरकतों ने बाइडेन प्रशासन को दुविधा में डाल दिया है. अमेरिका इसलिए भी इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं ले पा रहा है, क्योंकि भारत अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है और चीन को घेरने के लिए अमेरिका को भारत की सबसे ज्यादा जरूरत है. हालांकि, कनाडा भी अमेरिका का मित्र मुल्क है, लेकिन अमेरिका, भारत के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता है.
ऑस्ट्रेलिया के पीएम अल्बनीज बोले- chill out
कनाडा के खालिस्तानी आतंकी की हत्या का मुद्दा उठाने के बाद ऑस्ट्रेलिया से भी इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की जा रही थी. पत्रकारों ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) से इस मामले पर टिप्पणी करने की अपील की थी. इसके जवाब में अल्बनीज ने पत्रकार को बेफिक्र रहने (chill out) के लिए कहा था.

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