
'बांग्लादेश इंटरनेशनल कोर्ट में...' तीस्ता जल बंटवारे पर मोहम्मद यूनुस की सरकार ने कही ऐसी बात
AajTak
भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली नदियों के जल बंटवारे को लेकर अक्सर दोनों देशों में विवाद होता है. तीस्ता जल बंटवारे को सुलझाने के लिए अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं. सरकार की एक सलाहकार ने इस संबंध में एक कार्यक्रम में बात की है.
भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से विवाद का केंद्र रहे तीस्ता नदी जल बंटवारे का मुद्दा सुलझाने को लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं. अंतरिम सरकार की एक सलाहकार ने बुधवार को कहा कि बांग्लादेश जल्दी ही भारत से साथ सीमा पार नदियों के जल बंटवारे पर बातचीत के लिए कदम उठाएगा.
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, एक कार्यक्रम में बोलते हुए अंतरिम सरकार की जल संसाधन सलाहकार सईदा रिजवाना हसन ने कहा कि बांग्लादेश जल्द ही भारत के साथ सीमा पार नदियों के जल बंटवारे पर पर बातचीत की कोशिश करेगा.
उन्होंने कहा कि बातचीत जनता की राय पर विचार करने के बाद की जाएगी और बातचीत के नतीजों को लोगों के साथ साझा किया जाएगा.
रिजवाना ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नदियों का जल बंटवारा एक जटिल मुद्दा है, लेकिन जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान राजनीतिक नहीं होना चाहिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा कि कोई देश वर्षा के आंकड़े और नदियों की स्थिति के बारे में जानकारी मांग सकता है. आंकड़ों के आदान-प्रदान से जान-माल की हानि को रोकने में मदद मिल सकती है.
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन सलाहकार रिजवाना ने कहा कि कोई देश ऐसे मुद्दों पर एकतरफा तरीके से अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं जा सकता बल्कि दोनों देशों को वहां जाना चाहिए.

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.








