
'बकवास', ओला और उबर ने मर्जर की खबर को पूरी तरह नकारा
Zee News
देश में काम कर रहीं दो बड़ी कैब कंपनियों ओला और उबर ने मर्जर की खबर को पूरी तरह नकार दिया है. ओला के चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर भावेष अग्रवाल ने कहा है कि ये खबर पूरी तरह से गलत है. वहीं उबर ने भी साफ कर दिया है कि दोनों कंपनियों के बीच मर्जर को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है.
नई दिल्ली: देश में काम कर रहीं दो बड़ी कैब कंपनियों ओला और उबर ने मर्जर की खबर को पूरी तरह नकार दिया है. ओला के चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर भावेष अग्रवाल ने कहा है कि ये खबर पूरी तरह से गलत है. वहीं उबर ने भी साफ कर दिया है कि दोनों कंपनियों के बीच मर्जर को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है. Absolute rubbish. We’re very profitable and growing well. If some other companies want to exit their business from India they are welcome to! We will never merge.
एक अखबार ने की रिपोर्ट दरअसल इससे पहले खबर आई थी कि भारतीय कैब इंडस्ट्री में एक बड़े बदलाव की चर्चा है. इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि दोनों ही कंपनियां मर्जर पर विचार कर रही हैं. — Bhavish Aggarwal (@bhash)

Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.










