
प्रकति है तो हम हैं, World Environment Day पर ये जरूरी बातें आपको पता होनी ही चाहिए
Zee News
World Environment Day 5 June 2021: पर्यावरण की सुरक्षा के लिए विश्वभर में लोगों को कुछ सकारात्मक गतिविधियाँ के लिए प्रोत्साहित और जागरुक करने से जुड़ा ये दिन बेहद खास है. अब, यह 100 से भी अधिक देशों में लोगों तक पहुंचने के साथ बड़ा वैश्विक मंच बन गया है.
नई दिल्ली: आज विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) है. पर्यावरण को समर्पित इस दिन सभी को अपनी भागीदारी निभाने का संकल्प लेना चाहिए. पर्यावरण (Environment ) को लेकर हम जागरुक तो हैं, लेकिन फिर भी कहीं कसर रह गई है. आज जब दुनिया के किसी न किसी हिस्से में आए दिन कुदरत के कहर से हुई विनाशलीला की खबरें और तस्वीरें देखने को मिलती हैं तो सवाल ये उठता है कि क्या ये सब रोका जा सकता है. ऐसे में पर्यावरण के प्रति जागरुक रहने और दूसरों को जागरुक करने से पहले पर्यावरण के बारे में फैले कुछ संदेह दूर कर लेने चाहिए. इस साल की बात करें तो इसकी थीम बेहतर पर्यावरण के लिए बॉयोफ्यूल का प्रसार (Promotion of biofuels for better environment.) रखी गई है. वातावरण की सुरक्षा के लिए विश्वभर में लोगों को कुछ सकारात्मक गतिविधियाँ के लिए प्रोत्साहित और जागरुक करने के लिए यह दिन संयुक्त राष्ट्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है. अब, यह 100 से भी अधिक देशों में लोगों तक पहुँचने के लिए बड़ा वैश्विक मंच बन गया है.
Indian France Rafale deal: फ्रांस से खरीदे जाने वाले 114 राफेल की मंजूरी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मिल गई है. जिससे यह डील अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC की बैठक में डील पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जाएगी. अंतिम हस्तारक्षर इस डील पर पीएम मोदी करेंगे.

India Nuclear Powered Submarine: साल 2040 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी ऑपरेटर बन सकता है. इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा. दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर सबमरीन अमेरिका के पास हैं. इनकी संख्या 60 से 70 के बीच है.

DRDO hypersonic missile: भारतीय नौसेना एक बेहद लंबी दूरी वाली, हवा से लॉन्च होने वाली 'एंटी-शिप बैलिस्टिक' मिसाइल हासिल करने की योजना बना रही है. यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही उनके जहाजों को समंदर की गहराइयों में भेज सकेंगे.










