
पाक-अफगान तालिबान में गठजोड़, इमरान सरकार का संकट बढ़ा
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के लिए तैयार एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि प्रतिबंधित आतंकवादी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के पास अब भी अफगान सीमा पर लगभग 6,000 प्रशिक्षित लड़ाके हैं.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के लिए तैयार एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि प्रतिबंधित आतंकवादी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के पास अब भी अफगान सीमा पर लगभग 6,000 प्रशिक्षित लड़ाके हैं. यूएन एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शन मॉनिटरिंग टीम की 28वीं रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि अफगानिस्तान-चीन सीमा पर करीब सैकड़ों बीजिंग विरोधी चरमपंथियों की मौजूदगी बनी हुई है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमले में करता है. (टीटीपी प्रमुख नूर वाली महसूद, फोटो-CNN वीडियो ग्रैब) पाकिस्तान के अखबार डॉन के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की एक टीम ने इस सप्ताह UNSC में रिपोर्ट पेश की थी. इस टीम पर दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में आतंकवादी गतिविधियों पर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी होती है. (फोटो-Getty Images)
ऑपरेशन सिंदूर के महज चार दिन बाद 14 मई 2025 को शाम 4:59 बजे पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को रीसेट करने की कोशिश की थी, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा. पाकिस्तान की इस कोशिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्व अमेरिकी राजदूत पॉल डब्ल्यू. जोन्स की ओर से विदेश विभाग को भेजा गया एक खास ईमेल था. इस ईमेल के जरिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसीम मुनीर की आगामी वाशिंगटन यात्रा के एजेंडे और रणनीतिक बिंदुओं पर चर्चा की थी.

अमेरिका ने ईरान पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाकर एक बड़ा आर्थिक हमला किया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस नई नीति का असर भारत समेत करीब 147 देशों पर पड़ेगा जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं. ईरान तेल और गैस समेत कई उत्पादों का बड़ा निर्यातक है और ओपेक देश भी है. भारत और ईरान के बीच व्यापार पिछले पांच सालों में 84 प्रतिशत तक गिर चुका है. भारत मुख्य रूप से ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात करता है, जबकि ईरान से सूखे मेवे और केमिकल्स आयात करता है.

मुस्लिम ब्रदरहुड पर ट्रंप सरकार की बड़ी कार्रवाई, मिडिल ईस्ट में एक्टिव 3 ब्रांच को घोषित किया आतंकी
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