
नेपाल चुनाव से पहले विभाजन की कगार पर नेपाली कांग्रेस, देउबा की जगह नया नेता चुनने की तैयारी में असंतुष्ट गुट
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नेपाल कांग्रेस विभाजन की कगार पर पहुंच गई है. गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा की अगुवाई वाले असंतुष्ट धड़े की शेर बहादुर देउबा गुट के साथ बातचीत बेनतीजा रही. आज नेपाली कांग्रेस के प्रतिनिधि नया नेता चुनेंगे.
नेपाल आम चुनाव के मुहाने पर खड़ा है. सरकार के खिलाफ हुए जेन-जी आंदोलन के कारण केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और सुशीला कार्की की अगुवाई में अंतरिम सरकार का गठन हुआ था. नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव हैं और इससे पहले प्रमुख राजनीतिक पार्टी नेपाली कांग्रेस में जारी असंतोष खुलकर सामने आ गया है. नेपाली कांग्रेस विभाजन की कगार पर पहुंच गई है.
नेपाली कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के धड़े ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की जगह पार्टी का नया अध्यक्ष चुनने के लिए चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है. नेपाली कांग्रेस का एक धड़ा आज देउबा की जगह नया अध्यक्ष चुनेगा. यह निर्णय शेर बहादुर देउबा की सहमति के बगैर लिया गया है. इस गुट की अगुवाई नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा कर रहे हैं.
गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा की अगुवाई वाले गुट का दावा है कि उन्हें करीब 66 फीसदी सदस्यों का समर्थन प्राप्त है. इस सम्मेलन की शुरुआत 11 जनवरी को काठमांडू के भृकुटी मंडपम में हुई थी. यह महासम्मेलन दो दिन चलना था, लेकिन असंतुष्ट गुट के नेताओं ने इसे पहले एक दिन के लिए बढ़ा दिया था और फिर नई कार्यकारिणी के गठन के लिए 14 जनवरी को चुनाव का भी ऐलान कर दिया.
गौरतलब है कि शेर बहादुर देउबा की अगुवाई वाले गुट और असंतुष्ट धड़े में विशेष महासम्मेलन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था. देउबा गुट का मत था नकि आम चुनाव के बाद मई में 15वां अधिवेशन कराया जाए, लेकिन असंतुष्ट धड़ा चुनावों से पहले महासम्मेलन पर जोर दे रहा था.
असंतुष्ट धड़े के नेताओं का तर्क था कि Gen Z युवाओं की मांगों को संबोधित करने के लिए चुनाव से पहले महासम्मेलन जरूरी है और इससे संगठन को भी नया रूप दिया जा सकेगा. नेपाली कांग्रेस की चुनाव समिति ने नई कार्यकारिणी के चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है.
चुनाव समिति के अनुसार, मतदाता सूची और उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है. नेपाली कांग्रेस में कुल 4655 महाधिवेशन प्रतिनिधि हैं, जो मतदान के पात्र हैं. 12 और 13 जनवरी को को शेर बहादुर देउबा की अगुवाई वाले गुट और असंतुष्ट धड़े के नेताओं की कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला.

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