
ट्रेड, टैरिफ और... अमेरिका की 'गुड बुक्स' में लौटने के लिए पाकिस्तान ने क्या-क्या किया?
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से जोड़ने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और लॉबिंग मुहिम शुरू की है. वाशिंगटन स्थित लॉबिंग फर्म के जरिए पाकिस्तान ने व्यापार, निवेश और सुरक्षा जैसे मोर्चों पर अमेरिका को लुभाने के लिए एक 'ट्रांजैक्शनल' ऑफर पेश किया है.
पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के चार दिन बाद 14 मई 2025 को अमेरिका के साथ अपने संबंधों को सुधारने के लिए एक औपचारिक कोशिश शुरू की. पूर्व अमेरिकी राजदूत और 'स्क्वायर पैटन बॉग्स' के सलाहकार पॉल डब्ल्यू जोन्स ने अमेरिकी विदेश विभाग की सीनियर अधिकारी एलिजाबेथ के. हॉर्स्ट को एक ईमेल भेजा. इस ईमेल के साथ 'ए रिन्यूड पाकिस्तान-यूनाइटेड स्टेट्स रिलेशनशिप' नामक एक नीतिगत दस्तावेज अटैच था, जिसमें पाकिस्तान को आर्थिक, सुरक्षा और भू-राजनीतिक भागीदार के रूप में पेश किया गया.
पाकिस्तान ने इस मुहिम के जरिए एफएटीएफ (FATF) संबंधी चिंताओं को दूर करने और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस यात्रा का बंदोबस्त करने की कोशिश की.
इस दौरान पाकिस्तान ने अमेरिकी निर्यात बढ़ाने, टैरिफ कम करने और खनिज संसाधनों में सहयोग का प्रस्ताव रखा. जोन्स ने साफ किया कि उनकी फर्म विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के तहत पाकिस्तान सरकार की एक रजिस्टर्ड एजेंट के रूप में पारदर्शी तरीके से काम कर रही है.
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लॉबिंग के पीछे के खास चेहरे

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