
'ऑपरेशन सिंदूर' में पिटे, फिर लॉबिंग से व्हाइट हाउस पहुंचे! लीक ईमेल ने खोली आसीम मुनीर और PAK की पोल
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ऑपरेशन सिंदूर के महज चार दिन बाद 14 मई 2025 को शाम 4:59 बजे पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को रीसेट करने की कोशिश की थी, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा. पाकिस्तान की इस कोशिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्व अमेरिकी राजदूत पॉल डब्ल्यू. जोन्स की ओर से विदेश विभाग को भेजा गया एक खास ईमेल था. इस ईमेल के जरिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसीम मुनीर की आगामी वाशिंगटन यात्रा के एजेंडे और रणनीतिक बिंदुओं पर चर्चा की थी.
पाकिस्तान ने मई 2025 में अमेरिका के साथ अपने संबंधों को सुधारने के लिए एक रणनीतिक पहल की, जिसमें सेना प्रमुख जनरल आसीम मुनीर की वाशिंगटन यात्रा और आर्थिक सुधारों पर जोर शामिल था. पूर्व अमेरिकी राजदूत पॉल डब्ल्यू. जोन्स के माध्यम से विदेश विभाग को भेजे गए ईमेल में पाकिस्तान ने आर्थिक साझेदारी, खनिज संसाधनों और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का प्रस्ताव रखा गया था. इस प्रयास का मकसद अमेरिका के साथ कूटनीतिक बाधाओं को दूर करना और आर्थिक निवेश को बढ़ावा देना था. पाकिस्तान ने चीन और भारत के साथ अपने संबंधों को संतुलित करते हुए अमेरिका के साथ मजबूत सहयोग की इच्छा जताई.
जोन्स ने अपने ईमेल में पारदर्शी तरीके से स्वीकार किया कि उनकी फर्म पाकिस्तान सरकार के पंजीकृत एजेंट के रूप में काम कर रही है. उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग से पूछा कि क्या उनका प्रस्ताव वाशिंगटन की उम्मीदों के खिलाफ तो नहीं लग रहा है.
भारत-PAK संबंधों के चश्मे से संवाद जोन्स ने अपने ईमेल में एरिक मायर्स के साथ बैठक को दोबारा निर्धारित करने का सुझाव दिया जो दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के गहरे जानकार रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को इस बात का पूरा एहसास था कि अमेरिका के साथ उसकी किसी भी बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों के नजरिए से ही परखा जाएगा. इसीलिए इस्लामाबाद ने अनुभवी अमेरिकी मध्यस्थों का सहारा लिया, ताकि वे विदेश विभाग को सही तरीके से प्रभावित कर सकें और कूटनीतिक बाधाओं को दूर कर सकें.
एलिजाबेथ हॉर्स्ट की महत्वपूर्ण भूमिका
बता दें कि ये ईमेल एलिजाबेथ के हॉर्स्ट को संबोधित था, जो उस वक्त दक्षिण और मध्य एशियाई नीति देख रही थीं. हॉर्स्ट पहले श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत के रूप में काम कर चुकी थीं, जहां उन्होंने कर्ज संकट और चीनी निवेश जैसे मुद्दों को करीब से देखा था. पाकिस्तान के लिए उनका अनुभव काफी मायने रखता था, क्योंकि वह भी लगभग वैसी ही आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा था. पाकिस्तान चाहता था कि हॉर्स्ट उनके आर्थिक सुधारों के नैरेटिव को वाशिंगटन में मजबूती से पेश करें.
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