
ट्रंप फैक्टर से BRICS में दरार? युद्धाभ्यास में ईरान पर पीछे हटने का दबाव, फंसा साउथ अफ्रीका
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BRICS के पहले बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘विल फॉर पीस’ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दबाव साफ दिखने लगा है. ईरान को पीछे हटाने की कोशिशों ने BRICS की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
BRICS देशों के पहले बहुपक्षीय नौसैनिक युद्धाभ्यास 'विल फॉर पीस' पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सियासी छाया साफ नजर आने लगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, साउथ अफ्रीका ने आखिरी वक्त पर ईरान से इस अभ्यास में अपनी भूमिका सीमित करने या पूरी तरह पीछे हटने को कहा. इसकी वजह ट्रंप का ईरान को लेकर सख्त रुख और उस पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई का डर बताया जा रहा है.
यह नौसैनिक अभ्यास 13 जनवरी से केप टाउन के तट के पास शुरू हुआ है. इसकी मेजबानी चीन कर रहा है और यह BRICS का पहला ऐसा सैन्य अभ्यास है, जिसने पश्चिमी देशों में पहले ही असहजता पैदा कर दी थी. पश्चिमी देशों का सवाल है कि जो समूह एक आर्थिक गठबंधन के तौर पर बना था, उसे सैन्य अभ्यास की जरूरत क्यों पड़ी.
इस विवाद में ईरान की एंट्री ने तनाव और बढ़ा दिया. ईरान 2024 में BRICS में शामिल हुआ था. हालांकि भारत ने इस नौसैनिक अभ्यास से खुद को अलग रखा है.
दबाव के बावजूद ईरान का पलटवार
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप द्वारा ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को चेतावनी दिए जाने और अमेरिका-साउथ अफ्रीका संबंधों के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंचने के बाद प्रिटोरिया सरकार झुकती दिखी. साउथ अफ्रीका ने चुपचाप ईरान से कहा कि वह अभ्यास से हट जाए या सिर्फ पर्यवेक्षक की भूमिका निभाए.
शुरुआत में ईरान ने इस अनुरोध को मानते हुए खुद को पर्यवेक्षक के तौर पर सीमित करने पर सहमति जताई थी और उसके जहाजों के लौटने की संभावना जताई जा रही थी. लेकिन मंगलवार को तस्वीर बदल गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ईरानी युद्धपोत रूस, चीन, साउथ अफ्रीका और यूएई के जहाजों के साथ समुद्र में निकलता देखा गया. यह पश्चिमी दबाव को खुली चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.

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