
दस साल बाद फिर सवाल, क्या हवाना सिंड्रोम के पीछे रूस और क्यूबा की मिलीभगत थी? पेंटागन को मिली खुफिया डिवाइस
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लगभग दस साल पहले एक के बाद एक कई अमेरिकी डिप्लोमेट्स ने कान में तेज आवाज के साथ सिरदर्द जैसी न्यूरोलॉजिकल शिकायतें की थीं. इन सारे अधिकारियों के बीच कॉमन ये था कि वे क्यूबा की राजधानी हवाना में थे. अब एक बार फिर हवाना सिंड्रोम की चर्चा है.
साल 2016 में क्यूबा की राजधानी हवाना में पोस्टेड अमेरिकी राजनयिक एकाएक बीमार होने लगे थे. सबको कानों में तेज आवाज के साथ सिर दर्द और मतली की शिकायत थी. समस्या इतनी गंभीर थी कि डिप्लोमेट्स काम तक नहीं कर पा रहे थे. वे वापस लौट गए. दस साल बाद हवाना सिंड्रोम फिर चर्चा में है. इसकी वजह एक रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट एक रहस्यमयी डिवाइस की जांच कर रहा है, जो लोगों में हवाना सिंड्रोम जैसे लक्षण ला सकता है.
दरअसल माना गया था कि क्यूबा की सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों के साथ दुश्मनी निकालने के लिए उन्हें ये बीमारी दी थी. हवाना सिंड्रोम का मामला पहली बार साल 2016 में आया था, जब क्यूबा में रह रहे राजनयिकों ने सिरदर्द, चक्कर, सुनने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं गिनाई थीं. पोस्टिंग से पहले ये अधिकारी बिल्कुल स्वस्थ थे. कुछ ही महीनों में दुनिया के कई देशों में तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसे ही लक्षण रिपोर्ट किए.
अब यूएस रक्षा विभाग की कथित टेस्टिंग से फिर हवाना की चर्चा हो रही है. क्या वाकई क्यूबा ने कोई हथियार बनाया था, जो चुपचाप अधिकारियों को बीमार बना रहा था?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के रक्षा विभाग ने होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस को फंड दिया, ताकि सीक्रेट ऑपरेशन के जरिए एक खास डिवाइस खरीदी जा सके. डिवाइस के लिए अधिकारियों ने करोड़ों डॉलर की रकम चुकाई. पिछले सालभर से डिवाइस की जांच हो रही है. दावा है कि इससे रेडियो वेव्स निकलती हैं. इसी वेव को हवाना सिंड्रोम की वजह माना जाता रहा है. कथित तौर पर ये डिवाइस पूरी तरह रूस में बनी हुई नहीं, लेकिन उसके कई हिस्से रूसी हैं.
डिवाइस को लेकर वैसे राय बंटी हुई है. रक्षा विभाग में ही कुछ को लगता है कि इतना छोटा सिस्टम ऐसी विकिरण पैदा नहीं कर सकता, जिससे स्वस्थ लोगों को गंभीर समस्या होने लगे. वहीं कुछ का कहना है कि सालों पहले जो हुआ, उसकी जांच जरूरी है ताकि आगे ऐसा कुछ न होने पाए.

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