
ईरान गरजा, ट्रंप को बताया पहला किलर, दूसरे नंबर पर नेतन्याहू... मुल्क में अबतक 2500 मौतें
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ईरान में कयासों, अफवाहों और हिंसा का दौर चल रहा है. अब तक 2500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. लेकिन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की सरकार जरा भी नरमी नहीं दिखा रही है और ट्रंप को अभी भी हमले के खिलाफ धमकी दे रही है. इस बीच कई दिनों के बाद आज तेहरान में फोन लाइनें खोली गई है. इसके बाद वहां की जमीनी हालत की जानकारी लोगों को मिल रही है.
ईरान की सड़कों पर हंगामा जारी है. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिडंत हो रही है. इस बीच ईरान में चल रहे प्रदर्शनों और टकराव की वजह से मरने वालों की संख्या 2500 को पार कर गई है. कई दिनों के बाद ईरान के लोग दूसरे देशों में अपने रिश्तेदारों को फोन कर पाने में सक्षम हो पा रहे हैं. इसके साथ ही वहीं की खौफनाक हकीकत सामने आ रही है.
ईरान में अबतक मरने वालों की संख्या 2571 हो गई है. अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या कम से कम 2,571 हो गई थी. यह आंकड़ा कई दशकों में ईरान में किसी भी दूसरे विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं ज़्यादा है. और देश की 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है.
पहला हत्यारा ट्रंप है...
हालांकि ईरान का प्रशासन किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिखता है. ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर से अमेरिकी ट्रंप को कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिकी रवैये पर जवाब देते हुए लिखा, 'हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू."
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर मौतों की पुष्टि की. एक अधिकारी के हवाले से सरकारी टीवी ने कहा कि मुल्क में "बहुत सारे लोग शहीद" हुए हैं.
विद्रोहियों ने खामेनेई के लिए मौत की सजा मांगी

ऑपरेशन सिंदूर के महज चार दिन बाद 14 मई 2025 को शाम 4:59 बजे पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को रीसेट करने की कोशिश की थी, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा. पाकिस्तान की इस कोशिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्व अमेरिकी राजदूत पॉल डब्ल्यू. जोन्स की ओर से विदेश विभाग को भेजा गया एक खास ईमेल था. इस ईमेल के जरिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसीम मुनीर की आगामी वाशिंगटन यात्रा के एजेंडे और रणनीतिक बिंदुओं पर चर्चा की थी.

अमेरिका ने ईरान पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाकर एक बड़ा आर्थिक हमला किया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस नई नीति का असर भारत समेत करीब 147 देशों पर पड़ेगा जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं. ईरान तेल और गैस समेत कई उत्पादों का बड़ा निर्यातक है और ओपेक देश भी है. भारत और ईरान के बीच व्यापार पिछले पांच सालों में 84 प्रतिशत तक गिर चुका है. भारत मुख्य रूप से ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात करता है, जबकि ईरान से सूखे मेवे और केमिकल्स आयात करता है.

मुस्लिम ब्रदरहुड पर ट्रंप सरकार की बड़ी कार्रवाई, मिडिल ईस्ट में एक्टिव 3 ब्रांच को घोषित किया आतंकी
अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड के लेबनान, जॉर्डन और मिस्र के गुटों को आतंकी संगठन घोषित किया है. लेबनानी गुट को विदेशी आतंकी संगठन की सूची में डाला गया है जबकि जॉर्डन और मिस्र के गुटों पर हमास को समर्थन देने का आरोप है. यह फैसला ट्रंप प्रशासन के कार्यकारी आदेश के तहत लिया गया है.

राजदूतों को तलब करने का ये कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कई दिनों से जारी हैं. बता दें कि पिछले हफ्तों में विदेशों के कई देशों ने प्रदर्शनकारियों के लिए सकारात्मक बयान दिए थे, जिससे तेहरान प्रशासन नाराज चल रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का समर्थन करते हैं, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को नहीं.









