
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल को संसद में मिला प्रचंड बहुमत, 274 सांसदों में से 272 सांसदों का समर्थन
AajTak
नेपाल में चुनावी परिणाम आने के बाद नाटकीय राजनीतिक उठापटक के बीच पुष्प कमल दहल ने मंगलवार को संसद में विश्वास का मत हासिल कर लिया है. 275 प्रतिनिधि सभा वाले हाउस में पुष्प कमल दहल के पक्ष में 272 सांसदों का समर्थन मिला. सिर्फ दो सांसदों ने विपक्ष में मतदान किया. वहीं एक सांसद निलंबित होने के कारण मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं ले सके.
नेपाल में नाटकीय रूप से राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने मंगलवार को संसद में विश्वास का मत हासिल कर लिया. नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (यूएमएल) के समर्थन से प्रधानमंत्री बने पुष्प कमल ने मंगलवार को विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के समर्थन करने से भारी बहुमत हासिल किया है.
नेपाली कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन तोड़ कर पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के समर्थन से सरकार बनाने के बाद दहल ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष तथा निवर्तमान प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा से मुलाकात की थी. विश्वास मत से पूर्व संध्या पर मुलाकात के दौरान दहल ने देउबा से विश्वास मत देने का आग्रह किया था. नेपाली कांग्रेस ने आज सदन में मतदान से पहले ही पुष्प कमल दहल के पक्ष में समर्थन करने की घोषणा कर दी थी.
नेपाली कांग्रेस के इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए घटक दल के प्रमख नेता केपी ओली ने संसद में कहा कि संसद विपक्ष विहीन हो गया है. कांग्रेस की ओर से सरकार के पक्ष में मतदान करने के फैसले का स्वागत करते हुए ओली ने देउबा को धन्यवाद दिया. हालांकि, ओली ने कहा कि अगर इसके पीछे कांग्रेस की कोई दूसरी रणनीति है तो यह एक गंभीर विषय है.
विश्वास मत के दौरान देउबा, ओली और पुष्प कमल दहल के बीच संसद विघटन को लेकर एक दूसरे पर कटाक्ष करते हुए भी देखा गया. लेकिन 275 प्रतिनिधि सभा वाले हाउस में पुष्प कमल दहल के पक्ष में 272 सांसदों का समर्थन मिला. सिर्फ दो सांसदों ने विपक्ष में मतदान किया. वहीं एक सांसद निलंबित होने के कारण मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं ले सके.
नेपाल के प्रतिनिधि सभा में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की पार्टी के पास सिर्फ 38 सांसद ही हैं. लेकिन नेपाल की सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के 89 सांसद, नेकपा एमाले के 78 सांसद, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के 20 सांसद, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के 14 सांसद, जनता समाजवादी पार्टी के 12 सांसद, जनमत पार्टी के 6 सांसद, लोकतांत्रिक समाजवाद पार्टी के 4 सांसद, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के 4 सांसद के अलावा तीन निर्दलीय सांसदों ने भी दहल के पक्ष में मतदान किए.
विरोध में मतदान करने वाले नेपाल मजदूर किसान पार्टी तथा राष्ट्रीय जनमोर्चा के 1 - 1 सांसद शामिल हैं.

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिन की छूट दी, लेकिन ईरान ने एक्स्ट्रा तेल होने से इनकार कर दिया. दोनों के दावों से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. दुनियाभर के मुल्क ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अमेरिकी की ओर से छूट मिलने के बाद ईरान का तेल उन्हें मिलेगा. लेकिन, ईरान के बयान से सभी को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान काअबक का सबसे बजड़ा हमला है. डिएगो गारर्सिया बोहद रणनीतिक सैन्य अड्डा है. B-52 बॉम्बर विमान, लंबी दूरी के हमले के हथियार इस बेस पर मौजूद है.

ईरान युद्ध के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग होकर काम कर रहा है. हालांकि यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी रणनीतिक रूप से साथ हैं और ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ की भूमिका निभा सकते हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग चल रहा है या रणनीति का हिस्सा है?

इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर हवाई हमला किया है. इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले जारी है. इजरायली हमलों से लगातार ईरान में तबाही मची हुई है. ईरान की राजधानी तेहरान इन हमलों से सबसे ज्यादा ग्रसित है, जहां लोग इन हमलों के बीच डर में रहने को मजबूर है. तेहरान के की इलाकों को इस हमले में निशाना बनाया गया.

ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी है. व्हाइट हाुस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने युद्धविराम पर बात करते हुए कहा कि अमेरिका बातचीत कर सकता है, लेकिन युद्धविराम पर कोई विचार नहीं है. साथ ही येभी कहा कि जब सामने वालो पक्ष को अमेरिका पूरी तरह से नष्ट कर रहा है तो युद्धविराम नहीं होगा.







