
दुनियाभर में 7 करोड़ से ज्यादा लोग एक साल के भीतर हुए बेघर, कौन हैं ये लोग, जिनकी हालत रिफ्यूजियों से भी बदतर
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युद्ध या किसी डर की वजह से देश छोड़ने वाले लोगों पर तो बात होती रही, लेकिन अब इस श्रेणी में वे लोग भी शामिल हो चुके, जो अपने ही घर में बेघर हो चुके हैं. नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल और इंटरनल डिसप्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर की रिपोर्ट दुनिया में बदलते भयावह हालात को दिखाती है. इसके मुताबिक, केवल साल 2022 में ही 7 करोड़ से ज्यादा लोग अपने देश में विस्थापित हुए.
अपना देश, अपने लोगों को छोड़कर जाना आसान नहीं होता, खासकर जब ये कदम मजबूरी में उठाना पड़े. लेकिन उन लोगों की स्थिति और खराब होती है, जो अपने मुल्क में रहते हुए भी विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं. ये लोग इंटरनली डिसप्लेस्ड पीपल (IDP) कहलाते हैं. ऐसे लोगों पर शोध कर रही संस्थाओं ने माना कि बीते साल ये संख्या सबसे ज्यादा रही.
यूनाइटेड नेशन्स ह्यूमन राइट्स ऑफिस ऑफ द हाई कमिश्नर में अपने घर में विस्थापन झेल रहे लोगों के बारे में चेताते हुए कहा गया कि ये वो कैटेगरी है, जिसे पहचानना आसान नहीं. ऐसे में उन्हें कोई सुविधा भी नहीं मिल पाती. यही कारण है कि शरणार्थियों की तुलना में ये लोग ज्यादा तकलीफ झेलते हैं.
क्या वजह है विस्थापन की जिन वजहों से शरणार्थी एक से दूसरे देश विस्थापित होते हैं, डिसप्लेस्ड लोगों के भी बिल्कुल वही हालात होते हैं. साल 1951 कन्वेंशन ऑन द स्टेटस ऑफ रिफ्यूजी में माना गया कि युद्ध, कुदरती आपदा, जैसे बाढ़, तूफान या भूकंप, राजनैतिक भूचाल जैसे हालातों में जब लोग अपने देश में जान का खतरा महसूस करते हैं तो वे दो फैसले ले सकते हैं. या तो वे देश छोड़कर दूसरे देश चले जाते हैं, या फिर अपना घर छोड़कर एक से दूसरे राज्य जाते हैं.
बॉर्डर क्रॉस करने वाले रिफ्यूजी होते हैं, जबकि किसी भी वजह से सीमा पार न कर पाए लोग देश में ही विस्थापित की श्रेणी में आ जाते हैं, जिन्हें इंटरनली डिसप्लेस्ड पर्सन कहते हैं. रिफ्यूजियों से अलग, इंटरनेशनल लॉ में इन सताए हुए लोगों के लिए खास कानून या प्रिविलेज नहीं है.
क्या कहती है हालिया रिपोर्ट नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल के अनुसार, साल 2022 में 7 करोड़ से ज्यादा लोग IDP की श्रेणी में आए, यानी अपने ही घर में बेघर हो गए. गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दावा किया गया कि बीते साल की तुलना में ये विस्थापन 20 फीसदी ज्यादा है. रूस-यूक्रेन जंग के कारण ही साल 2022 के आखिर तक लगभग 60 लाख लोग यूक्रेन में अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए. इनमें कई लोग एक से ज्यादा बार विस्थापित हुए.
यहां तक कि हाल में शुरू हुए सूडान गृह युद्ध के चलते भी लगभग 7 लाख लोगों ने अपना घर छोड़ा और उन राज्यों की तरफ गए जहां थोड़ा कम खतरा हो.

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