
ट्रंप के टैरिफ़ पर कोर्ट की रोक, लेकिन अलग-अलग तरीकों से ये ऐसे रहेंगे लागू
BBC
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर रेसिप्रोकल और देश विशेष टैरिफ़ नहीं लगा सकते. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि स्थितियां ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले जैसी हो जाएंगी.
व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग को गिराने से लेकर विदेशी नेताओं को पकड़ने तक- इस राष्ट्रपति को 'न' सुनने की आदत नहीं रही है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले ने उनकी मौजूदा व्यापार रणनीति को पटरी से उतार दिया है.
इस फ़ैसले में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर रेसिप्रोकल (परस्पर) और देश विशेष टैरिफ़ नहीं लगा सकते.
पिछले साल अप्रैल में लिबरेशन डे पर रोज़ गार्डन में दिखाई गई टैरिफ़ की सूची और हाल ही में ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की उनकी योजना का समर्थन न करने वाले यूरोपीय देशों को टैरिफ़ की धमकी, इन दोनों ने विश्व व्यापार व्यवस्था को उलट-पलट कर रख दिया. इससे विकास को भारी धक्का लगने का ख़तरा पैदा हो गया.
लेकिन अगर आप यह सोच रहे हैं कि हम ट्रंप से पहले के दौर में लौट रहे हैं, जब सब कुछ सामान्य था- तो ठहरिए और फिर से सोचिए.
पहली बात तो यह कि यह फ़ैसला केवल उन अतिरिक्त टैरिफ़ को अमान्य करता है जो ट्रंप ने पिछले साल पद संभालने के बाद लगाए थे. लिबरेशन डे के बाद हुई कड़ी सौदेबाज़ी के बाद अमेरिका में सामान बेचने वाले देशों के लिए औसत टैरिफ़ दर लगभग 15% पर आकर टिकी थी.
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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले ने सैद्धांतिक रूप से इस दर को आधे से भी कम कर दिया है. लेकिन यह अब भी 6% से ऊपर है, जो 2025 की शुरुआत में सामान्य दर से लगभग तीन गुना है- क्योंकि अलग अलग तरीकों से लगाए गए टैरिफ़ अभी भी लागू हैं.













