
टेस्ट की हार की टीस पर कोहली-रोहित का मरहम..! क्या इससे फ्यूचर को लेकर सवाल थम जाएंगे?
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भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच रांची वनडे में मिली 17 रनों की जीत सिर्फ एक मैच का नतीजा नहीं थी, बल्कि टेस्ट सीरीज के 0-2 व्हाइटवॉश से लगी चोट पर बड़ा मरहम साबित हुई. 37 साल के विराट कोहली के 135 रन और 38 साल के रोहित शर्मा के साथ 136 रनों की साझेदारी ने न सिर्फ टीम का मनोबल लौटाया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि अनुभव और क्लास का कोई विकल्प नहीं. हालांकि इस जीत ने भरोसा जरूर जगाया, लेकिन टेस्ट की हार से उठे सवाल अब भी मौजूद हैं.
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 0-2 की टेस्ट सीरीज हार ने भारतीय क्रिकेट को अजीब-सी खामोशी दे दी थी. वह खामोशी जिसमें सवाल भी थे, नाराजगी भी और दिशाहीनता का एहसास भी. आलोचना का ताप इतना तेज था कि टीम का मनोबल तक पिघलता दिख रहा था. लेकिन क्रिकेट की खूबी ही यही है...एक हार आपको डुबोती है, तो अगला फॉर्मेट आपको किनारे भी लगा देता है.
रांची में खेले गए मौजूदा सीरीज के पहले वनडे ने यही किया. भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 17 रनों से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाई और टेस्ट की हार से बने माहौल को कुछ ही दिनों में हल्का कर दिया. लेकिन यह सिर्फ एक जीत नहीं थी- यह दो दिग्गजों की धाक थी. उन्हीं की वापसी ने वह सब बदल दिया जो पिछले दो हफ्तों से बिगड़ा पड़ा था.
37 साल के विराट कोहली पर पिछले दिनों सवालों की बौछार हुई- क्या अब उम्र पकड़ रही है? क्या वनडे में नए चेहरे को तरजीह मिलनी चाहिए? क्या समय आ गया है कि कोहली धीरे-धीरे वनडे से भी दूरी बनाने लगें? आलोचनाओं की ये आवाजें लगातार बढ़ रही थीं, मानो कोहली से ज्यादा उनकी उम्र खेल रही हो.
कोहली ने रांची में इन तमाम सवालों को एक झटके में हवा में उड़ा दिया. 135 रन, 52वां वनडे शतक और वही पुरानी क्लास- गैप ढूंढना, रन बनाते जाना और हर मौके पर नियंत्रण स्थापित करना.
उन्होंने यह साफ संदेश दे दिया- 'उम्र मत देखिए, आंकड़े देखिए. खेल आज भी मेरे काबू में है.' उनकी पारी मैच जिताऊ थी, पर उससे ज्यादा 'करियर जिताऊ' संदेश थी, जिसने सोशल मीडिया और क्रिकेट मंडलों में तुरंत एक नई बहस भड़का दी... टेस्ट में ज्यादा भरोसा युवाओं पर करना सही था? क्या टीम मैनेजमेंट ने फॉर्मेट की प्राथमिकता गलत तय की?
क्या बड़े फॉर्मेट में भी बड़े खिलाड़ी ही बैलेंस बनाते हैं?

टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती को लेकर आगाह किया है. उनका मानना है कि ओस के कारण स्पिन और तेज गेंदबाजी के संतुलन को लेकर टीम मैनेजमेंट को मुश्किल फैसले लेने पड़ेंगे. कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती को एक साथ खिलाना या नहीं, यही भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल होगा.












