
टीम इंडिया से बाहर चल रहा ये बैटर इंग्लैंड में खेलेगा क्रिकेट, बेहद शानदार रहा है करियर
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भारतीय बल्लेबाज मयंक अग्रवाल, जो पिछले तीन साल से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं, अब इंग्लैंड में पहली बार काउंटी क्रिकेट खेलेंगे. वह यॉर्कशायर की टीम से जुड़कर समरसेट के खिलाफ 8 सितंबर से शुरू होने वाले मुकाबले में उतरेंगे. मयंक तीन मैच खेलने के बाद रणजी ट्रॉफी के नए सीजन में कर्नाटक का नेतृत्व करेंगे.
टीम इंडिया से बाहर चल रहा एक स्टार बल्लेबाज अब इंग्लैंड में जाकर काउंटी क्रिकेट खेलेगा. उसे पूरी उम्मीद है कि वहां अच्छे प्रदर्शन के बाद उसकी टीम इंडिया में वापसी का रास्ता खुलेगा. यह वही खिलाड़ी है जिसने आते ही टेस्ट क्रिकेट में धूम मचा दी थी और शुरुआती मैचों में शतक जड़े थे. लेकिन चोटिल होने के बाद उसका करियर पटरी से उतर गया.
जब वह फिट होकर लौटा तो पहले जैसी फॉर्म नहीं दिखा पाया और लगातार संघर्ष करते हुए टीम से बाहर हो गया. पिछले तीन साल से वह भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं है. हालांकि घरेलू क्रिकेट में उसने कुछ शानदार पारियां खेलकर अपनी दमदार मौजूदगी का एहसास कराया है. अब यह बल्लेबाज इंग्लैंड की कठिन परिस्थितियों में खुद को आजमाने के लिए काउंटी क्रिकेट खेलेगा.
यह कोई और नहीं बल्कि कर्नाटक के दाएं हाथ के अनुभवी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल हैं. ईएसपीएन क्रिकइंफो की एक रिपोर्ट के मुताबिक मयंक अग्रवाल 8 सितंबर से टॉन्टन के काउंटी ग्राउंड में समरसेट के खिलाफ होने वाले मैच से पहले टीम में शामिल हो जाएंगे. वो यॉर्कशर के लिए कुल 3 मैच खेलेंगे. इसके बाद 2025-26 रणजी ट्रॉफी के लिए भारत वापस लौट आएंगे. यह उनका पहला काउंटी चैम्पियनशिप अनुभव होगा.
आखिरी बार कब टेस्ट खेले थे मयंक अग्रवाल? मयंक अग्रवाल ने भारत के लिए अपना आखिरी टेस्ट मुकाबला फरवरी 2022 में बेंगलुरु में श्रीलंका के खिलाफ खेला था. यह उनके करियर का 21वां टेस्ट था. 2021-22 के इंग्लैंड दौरे पर उन्हें ओपनिंग का मौका मिलना था, लेकिन प्रैक्टिस के दौरान चोट लगने के चलते वो पहले टेस्ट से ही बाहर हो गए. तब से उन्हें टीम इंडिया में दोबारा जगह नहीं मिल सकी और वो केवल आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में ही खेलते रहे हैं.
क्या है मयंक अग्रवाल का मिशन? मयंक अग्रवाल का मकसद टीम इंडिया में वापसी करना है. फिलहाल टेस्ट टीम में नंबर 3 की जगह खाली है और मयंक इसी पोजीशन को ध्यान में रखते हुए अगला घरेलू सीजन खेलेंगे. 2018 से 2022 तक वह टेस्ट टीम का अहम हिस्सा रहे और 41.33 की औसत से 1488 रन बनाए, जिसमें 2 दोहरे शतकों के साथ कुल 4 शतक शामिल हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 243 रन है, जो उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ बनाया था.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












