
जो बाहर दिखता है, अंदर उसी शेप और साइज में मिलता है स्नैक्स, जानें जापान का पैकेजिंग सिस्टम
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जापान में जब आप किसी स्नैक्स या बिस्किट का पैकेट खरीदते है तो अंदर का प्रोडक्ट बिल्कुल वैसा ही दिखता है जैसा पैक पर फोटो में दिखाया गया है. न कोई ओवर एडिटिंग, न झूठे वादे.
क्या आपने कभी कोई स्नैक्स खरीदा है जिसकी पैकेजिंग पर तो स्नैक्स काफी बड़े और आकर्षक दिखते हैं, लेकिन पैकेट खोलते ही हकीकत कुछ और निकलती है? ज्यादातर देशों में ऐसा आम है- कंपनियां पैकेट पर सुंदर तस्वीरें दिखाकर ग्राहकों को लुभाती हैं, जबकि असली प्रोडक्ट तस्वीर से काफी अलग होता है. लेकिन जापान इस मामले में पूरी तरह अलग सोच रखता है. जापान में स्नैक्स और फूड कंपनियां इस बात का खास ध्यान रखती हैं कि जो भी प्रोडक्ट पैकेट पर दिखाया गया है, वही आकार, रंग और बनावट असली उत्पाद में भी झलके।. यानी, अगर पैकेजिंग पर बिस्किट या वेफर गोल और सुनहरा दिख रहा है, तो असली बिस्किट भी लगभग वैसा ही होगा. इसके साथ ही पैकेट पर दिखने वाला इमेज और साइट बिल्कुल अंदर के प्रोडक्ट की तरह ह होंगे.
क्या जापान में इसको लेकर है कोई कानून दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए कोई सरकारी कानून नहीं है. जापान में ऐसा कोई नियम नहीं है जो कहता हो कि पैकिंग और असली प्रोडक्ट बिल्कुल समान होना चाहिए. फिर भी कंपनियां इसे अपनी मर्जी से अपनाती हैं, क्योंकि उनके लिए ग्राहक का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण होता है. जापानी संस्कृति में "सटीकता" और "ईमानदारी" बेहद अहम मानी जाती है. यहां माना जाता है कि किसी को झूठे दिखावे से प्रभावित करना गलत है. इसलिए कंपनियां अपनी पैकेजिंग डिजाइन करते समय बहुत सावधानी बरतती हैं. वे कोशिश करती हैं कि फोटो में जो दिखे, वही उपभोक्ता को मिले। कई बार शेफ और डिजाइनर साथ बैठकर यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद का आकार, रंग और टेक्सचर पैक पर बनी तस्वीर से मेल खाए.
क्या है इसके पीछे का कारण इसके पीछे एक और कारण है — ग्राहक का विश्वास (Customer Trust). जापानी उपभोक्ता उम्मीद करते हैं कि कंपनी जो वादा करे, वह निभाए. अगर किसी कंपनी की पैकिंग भ्रामक निकली, तो उपभोक्ता उस ब्रांड से दूरी बना लेते हैं. इससे कंपनी की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ता है. इसलिए वहां की कंपनियां सच्चाई और पारदर्शिता को सबसे ज्यादा महत्व देती हैं.
दूसरी तरफ, दूसरे देशों में अक्सर देखा जाता है कि पैकेट पर आकर्षक फलों या चॉकलेट की तस्वीरें होती हैं, जबकि उत्पाद में उनका अंश नाम मात्र का होता है. कंपनियां अक्सर कानून की खामियों का फायदा उठाकर उत्पादों को “फ्रूट फ्लेवर” या “नेचुरल टेस्ट” जैसे शब्दों में प्रचार करती हैं, जबकि असलियत कुछ और होती है. यही वजह है कि जापान की कंपनियां आज पूरी दुनिया में "ईमानदार ब्रांडिंग" का उदाहरण मानी जाती हैं. उन्होंने साबित किया है कि जब उपभोक्ता का भरोसा प्राथमिकता बन जाता है, तो न सिर्फ ब्रांड की छवि मजबूत होती है, बल्कि एक जिम्मेदार व्यापार संस्कृति भी विकसित होती है.

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