
जानिए CAA कानून क्या है और इसके लागू होने से किसके लिए क्या बदल जाएगा, किन प्रावधानों पर आपत्तियां हैं, 10 बड़े सवालों के जवाब
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भारतीय नागरिकता (संशोधन) कानून पर 5 साल पहले ही मुहर लग गई थी. हालांकि, यह अब तक लागू नहीं हो पाया है. सीएए को लेकर पूरे देश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. खासकर पूर्वोत्तर के सात राज्य इसके खिलाफ हैं. विरोध को लेकर नॉर्थ ईस्ट सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है. वहां तोड़फोड़ की वजह से करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था.
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने दावा किया है कि अगले सात दिन के अंदर नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA) पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा. ठाकुर ने यह बयान पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया. शांतनु ने बंगाली में कहा, मैं गारंटी दे सकता हूं कि अगले सात दिनों में ना सिर्फ पश्चिम बंगाल में, बल्कि पूरे देश में सीएए लागू किया जाएगा. इस बयान के बाद सीएए एक बार फिर चर्चा में है. भारतीय नागरिकता कानून क्या है और इसके लागू होने से क्या बदल जाएगा? किन प्रावधानों पर सबसे ज्यादा आपत्तियां हैं... जानिए सभी बड़े सवालों के जवाब.
बता दें कि भारतीय नागरिकता (संशोधन) कानून पर 5 साल पहले ही मुहर लग गई थी. हालांकि, यह अब तक लागू नहीं हो पाया है. सीएए को लेकर पूरे देश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. खासकर पूर्वोत्तर के सात राज्य इसके खिलाफ हैं. विरोध को लेकर नॉर्थ ईस्ट सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है. वहां तोड़फोड़ की वजह से करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था. इस कानून के खिलाफ विपक्ष का भी कड़ा रुख देखने को मिला था. इस महीने की शुरुआत में खबर आई थी कि सीएए के नियम केंद्र के पास तैयार हैं और लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले अधिसूचित (नोटिफाई) कर दिया जाएगा.
क्या है सीएए?
सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के लागू होने पर तीन पड़ोसी मुस्लिम बाहुल्य देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन लोगों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी, जो दिसंबर 2014 तक किसी ना किसी प्रताड़ना का शिकार होकर भारत आए. इसमें गैर-मुस्लिम माइनोरिटी- हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं. नागरिकता संशोधन बिल पहली बार 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था. यहां से तो ये पास हो गया था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया था. बाद में इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया और फिर 2019 का चुनाव आ गया. फिर से मोदी सरकार बनी. दिसंबर 2019 में इसे लोकसभा में दोबारा पेश किया गया. इस बार ये बिल लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगह से पास हो गया. 10 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी. लेकिन उस समय कोरोना के कारण इसमें देरी हुई.
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