
चीन में शी जिनपिंग की कैबिनेट में रह चुके दो पूर्व रक्षा मंत्रियों पर चलेगा करप्शन का केस, दोनों को कम्युनिस्ट पार्टी से निकाला, जानिए क्या है आरोप
AajTak
शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने कथित भ्रष्टाचार के लिए जनरल वेई, 70, और जनरल ली, 66 को निष्कासित कर दिया है और उनके खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही शुरू की है, क्योंकि जांच में कथित तौर पर दोनों को भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया है.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अधीन काम करने वाले दो पूर्व चीनी रक्षा मंत्रियों, वेई फेंगहे और उनके उत्तराधिकारी ली शांगफू को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. उन पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सबसे खराब घोटाले में मुकदमा चलाया जाएगा. अलग-अलग आधिकारिक घोषणाओं में कहा गया है कि शी के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ने कथित भ्रष्टाचार के लिए जनरल वेई, 70, और जनरल ली, 66 को निष्कासित कर दिया है और उनके खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही शुरू की है, क्योंकि जांच में कथित तौर पर दोनों को भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया है.
एजेंसी के मुताबिक साल 2023 चीनी मंत्रियों के लिए सबसे खराब वर्ष के रूप में भी जाना जाएगा, क्योंकि पूर्व विदेश मंत्री किन गैंग के अलावा वेई और ली सहित तीन मंत्री सार्वजनिक रूप से गायब हो गए थे. कथित भ्रष्ट आचरण की जांच के बाद पिछले साल लापता हुए ली को पार्टी अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.
एयरोस्पेस इंजीनियर हैं ली
इसी तरह की घोषणा में कहा गया कि वेई को भी पार्टी से निकाल दिया गया है और उन पर मुकदमा चलाया जाएगा. वेई ने 2018-23 तक रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया और ली ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में कुछ ही महीने सेवा की. ली, एक चीनी एयरोस्पेस इंजीनियर, जिन्होंने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सभी महत्वपूर्ण रॉकेट (मिसाइल) बल का नेतृत्व किया और उन्हें खुद शी जिनपिंग ने शीर्ष रक्षा पद के लिए चुना था. वह पिछले साल लापता हो गए, जिससे अटकलें लगाई जाने लगीं थी कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के लिए उनकी जांच की जा रही है.
जिनपिंग ने किया था बाहर
दोनों ने पार्टी में शीर्ष पद स्टेट काउंसिलर के रूप में और केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के सदस्य के रूप में कार्य किया है, जो शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली पीएलए की समग्र उच्च कमान है. सीपीसी केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की एक बैठक के अनुसार दोनों को 20वीं सीपीसी राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में उनकी योग्यता से वंचित कर दिया गया था. ली उन दर्जनों शीर्ष पीएलए जनरलों में शामिल हैं, जिन्हें 2012 में शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद से भ्रष्टाचार के लिए बर्खास्त या दंडित किया गया.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.








