
चार संपादक, 32 सवाल, 97 मिनट और सामने देश के प्रधानमंत्री... पढ़ें- नरेंद्र मोदी का सबसे सॉलिड इंटरव्यू
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजतक के साथ एक विशेष इंटरव्यू के दौरान कई बड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी. इंडिया टुडे ग्रुप के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल, मैनेजिंग एडिटर अंजना ओम कश्यप, मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह और कंसल्टिंग एडिटर सुधीर चौधरी के सवालों के पीएम ने जवाब दिए.
लोकसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'आजतक' ने सबसे सॉलिड इंटरव्यू लिया. इस इंटरव्यू में पीएम मोदी ने विपक्ष के हर आरोप और चुनावी मुद्दे पर बेबाक राय रखी. इंडिया टुडे ग्रुप के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल, मैनेजिंग एडिटर अंजना ओम कश्यप, मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह और कंसल्टिंग एडिटर सुधीर चौधरी के सवालों के पीएम ने जवाब दिए. पढ़ें- वे सवाल-जवाब शब्दशः
अंजना ओम कश्यपः प्रधानमंत्री जी, लोग जब चुनाव की तैयारी करते हैं तब उम्मीदवारों की लिस्ट बनाते हैं. घोषणा पत्र और स्टार कैंपेनर तय करते हैं लेकिन आप 100 दिन आगे का एजेंडा बनाने में लग गए हैं. पहला प्रश्न आपसे यही है कि 2014 में जब आप आए तो सौ दिन के अंदर आपने ओआरओपी, काले धन पर एसआईटी गठित की. 2019 में आए तो 62 दिन में आपने ट्रिपल तलाक और 66 दिन में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया. 2024 में अगर आप सत्ता में आते हैं तो सौ दिन में क्या करेंगे, कौन से बड़े और सख्त फैसले ले सकते हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीः एक तो शायद मेरी कार्यशैली का हिस्सा है कि चीजों को बहुत वेल एंड एडवांस करता हूं. जब संगठन का काम करता था, तब भी काफी पूर्वानुमान लगाता था कि मुझे इस समय ये करना है, इस समय ये करना है. इसलिए टाइम का भी ढंग से बंटवारा करता हूं. प्राथमिकता भी बड़ी आसानी से तय कर सकता हूं. किसी मैनेजमेंट स्कूल का स्टूडेंट तो नहीं रहा लेकिन शायद यह काम करते-करते डेवलप हुआ है. बहू भी जब शादी करके घर में नई आती है, पहले पांच-सात-दस दिन बराबर देखा जाता है कि यह कैसे काम करती है, कैसा स्वभाव है. ये दुनिया का स्वभाव है. मुझे लगा कि इसको एड्रेस करना चाहिए.
एक बड़ी मजेदार घटना बताता हूं. 26 जनवरी को गुजरात में भूकंप आया. भयंकर भूकंप था. उस वक्त मैं पार्टी का काम करता था कि अक्टूबर में मुझे अचानक सीएम बनना पड़ा. सीएम की शपथ लेकर सीधा भूकंप प्रभावित इलाके में चला गया. दो-तीन रात वहीं रहा और देखा सब चीजें. पहले वॉलंटियर के रूप में देखता था, अब सीएम के रूप में देख रहा था और फिर आकर अधिकारियों की मीटिंग ली. सबने बताया कि मार्च तक यह हो जाएगा, वो हो जाएगा. मैंने उनसे कहा कि सबसे पहले ये मार्च वाला बजट कैलेंडर बाजू में रख दो और बताओ कि 26 जनवरी के पहले क्या करोगे? दुनिया 26 जनवरी को देखने आएगी कि एक साल में क्या किया है, सारा पॉइंट आउट करके बताइए. फिर पूरी मशीनरी को सक्रिय किया और यहां शायद 24 जनवरी को दिल्ली आकर प्रेसवार्ता कर देश को रिपोर्ट कार्ड दिया था और उस समय जैसा मेरा अनुमान था, मीडिया गुजरात पहुंचा था. लेकिन 24, 25, 26 जनवरी की रिपोर्ट्स में वाहवाही के सिवाय कुछ नहीं था. उसका एक कारण ये था कि मैंने मार्च के डेड एंड को प्रीपोन कर लिया. इसकी ताकत समझता हूं और इसलिए एक 100 दिन का एजेंडा सेट करता हूं.
मैं यह नहीं चाहता हूं कि सरकार चलती है, यार कोई अच्छी चीज आ जाएगी देख लेंगे. जी नहीं. सरकार मुझे चलाना है. सरकार चलती है इसके लिए मुझे लोगों ने नहीं बैठाया है. मुझे देश में कुछ चीजों को चलाना है. मुझे कुछ चीजों को बदलना है और इसलिए मैंने क्या किया कि 2014 में सौ दिन के लिए सोचा. पांच साल के लिए मेरे पास मैनिफेस्टो होता है. 2019 में यह भी देखा, साथ-साथ ग्लोबल चीजों की तरफ थोड़ा ध्यान दिया. 2024 के लिए मेरी सोच थोड़ी लंबी है. पिछले पांच साल से काम कर रहा हूं. 20 लाख से ज्यादा लोगों से इनपुट लिए हैं और उनके आधार पर 2047 का एक विजन डॉक्यूमेंट बना रहा हूं. इस पर काम करते-करते अफसरों की दो पीढ़ी रिटायर हो चुकी होगी. काफी नए लोग आए हैं. अभी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के एक महीने पहले सभी सचिव और काउंसिल की एक बड़ी समिट की और कहा कि इस विजन डॉक्यूमेंट में से मुझे पांच साल की प्राथमिकताएं बताएं. उसके आधार पर पांच साल का मैप बनाया. फिर उसमें से सौ दिन की प्राथमिकताएं तय कर दीं कि पहली प्राथमिकता ये होगी, दूसरी ये होगी. इस पर काम भी शुरू हो गया है. लेकिन अब मन में नया विचार आया है जो पहली बार आपके सामने बता रहा हूं. तब सौ दिन का सोच रहा था, तभी सवा सौ दिन पर सोचने के लिए मजबूर हो गया और उत्साहित भी हूं. देखा कि इस पूरे कैंपेन में फर्स्ट टाइम वोटर कहो या युवा पीढ़ी कहो, उनके एस्पिरेशन को फील कर रहा हूं. सौ दिन का प्लान कर लिया है, अब 25 दिन और जोड़ना चाहता हूं और उसे पूरी तरह यूथ पर फोकस करना चाहता हूं. 25 दिन टोटली डेडिकेट करना चाहता हूं.
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