
चारधाम और जोशीमठ पर सतपाल महाराज ने की समीक्षा बैठक, दिए ये निर्देश
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चार धाम यात्रा की शुरुआत करने के लिए उत्तराखंड पर्यटन और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने शनिवार को एक समीक्षा बैठक की. सतपाल महाराज ने कहा कि हमने सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से यह सूचना मांगी है कि चार धाम के अंदर कोई भी सड़क अगर कहीं धंसी है, नालियां जाम है और सीवरेज से कोई प्रॉब्लम है तो हमें अवगत कराएं, ताकि उसका जल्द उपाय किया जाए.
चार धाम यात्रा की शुरुआत करने के लिए उत्तराखंड पर्यटन और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने शनिवार को एक समीक्षा बैठक की. बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. मीडिया को संबोधित करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को जानकारी दे दी गई थी. आगे हमने यह निर्देश दिया कि जहां-जहां सड़क धंस रही है लैंडस्लाइड हो रहे हैं उसकी रोकथाम की जाए और रिपोर्ट भी दी जाए.
सतपाल महाराज ने कहा कि हमने सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से यह सूचना मांगी है कि चार धाम के अंदर कोई भी सड़क अगर कहीं धंसी है, नालियां जाम है और सीवरेज से कोई प्रॉब्लम है तो हमें अवगत कराएं, ताकि उसका जल्द उपाय किया जाए. चार धाम यात्रा को सुचारू रूप से बिना किसी व्यवधान के चालू किया जा सके. आगे उन्होंने कहा कि मारवाड़ी और हेलन बाईपास की भी चर्चा हुई है.
उत्तराखंड पर्यटन और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि लोग जब चार धाम की यात्रा के लिए आएंगे, जब बद्रीनाथ की यात्रा पर निकलेंगे तो जोशीमठ में भी रुकने की व्यवस्था की गई है. केयरिंग कैपेसिटी की भी व्यवस्था की जा रही है और सभी मार्ग खोले जाएंगे. यदि कहीं रास्ता धंस रहा हो तो रिपेयरिंग की जाएगी उसके लिए सरकार पूरी तरीके से तैयार है.
उन्होंने कहा कि लोगों के अंदर श्रद्धा है, यात्री निश्चित रूप से आएंगे. यात्रा सरल और सुखद होगी यह हमारी कोशिश है. उन्होंने कहा, मैं यह भी चाहूंगा कि लोग रास्ते में रुकते हुए जाएं जिससे कि एक्लमटाईज़ेशन हो सके.
ये शहर भी धंस रहे मालूम हो कि सिर्फ जोशीमठ की जमीन नहीं दरक रही है. सिर्फ उसी की दीवारों पर दरारें नहीं पड़ रही हैं. जोशीमठ जैसे उत्तराखंड में और भी शहर हैं जो दरारों के दर्द से परेशान हैं. ऋषिकेष, नैनीताल, मसूरी, टिहरी गढ़वाल, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भी घरों में दरारें देखी गई हैं. यानी उत्तराखंड के एक बड़े हिस्से में ये डरावनी दरारें और डरा रही हैं. इन शहरों या उनके कुछ हिस्सों के धंसने की शुरुआत हो चुकी है. इनके अलावा देश के दो महानगरों को भी यह खतरा है.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत के उत्तराखंड में जमीन धंसने का मामला सामने आ रहा है. दुनिया में सिर्फ जोशीमठ नहीं है जो धंस रहा है. धंसने की प्रक्रिया दुनिया के 36 और शहरों में हो रहा है. इसमें भारत के तटीय शहर मुंबई और कोलकाता भी हैं. असल में जमीन धंसने (Land Subsidence) को लेकर दो प्रक्रियाएं होती हैं. पहली जोशीमठ की तरह पहाड़ों की मिट्टी अंदर से खोखली हो जाए. तो वह शहर ऊपर से नीचे की ओर आ गिरे. दूसरा किसी भी शहर या तटीय इलाके में बसे शहर से इतना पानी बोरिंग से निकाला जाए कि जमीन अंदर से खोखली हो जाए. तो वह धंस सकती है.

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