
घरों के अंदर बेडरूम तक पहुंचे उपद्रवियों के पत्थर... महू के पीड़ितों ने बयां किया हिंसा का खौफनाक मंजर, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट
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Mhow Violence: इस घटना में राधे कौशल के घर पर हुए हमले में उनकी 80 वर्षीय मां घायल हो गईं, जबकि नीचे चल रही मेडिकल दुकान को आग के हवाले कर दिया गया. हिंसा करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली, जिसमें गाड़ियों, दुकानों और घरों को निशाना बनाया गया.
भारतीय क्रिकेट टीम के चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद मनाए गए जश्न के दौरान मध्य प्रदेश के महू में भयानक हिंसा भड़की. कस्बे के पत्ती बाजार चौराहे पर उपद्रवियों ने जमकर पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की. इस घटना में राधे कौशल के घर पर हुए हमले में उनकी 80 वर्षीय मां घायल हो गईं, जबकि नीचे चल रही मेडिकल शॉप को आग के हवाले कर दिया गया. हिंसा करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली, जिसमें गाड़ियों, दुकानों और घरों को निशाना बनाया गया. दरअसल, रविवार रात भारतीय टीम की जीत के बाद महू में तिरंगा यात्रा के रूप में एक रैली निकाली जा रही थी. स्थानीय दुकानदार राधे कौशल के अनुसार, रैली जब पत्ती बाजार के पास मस्जिद के नजदीक पहुंची, तो वहां 500-700 लोगों की भीड़ जमा हो गई. रैली के साथ विवाद के बाद पुलिस ने स्थिति को संभाला, लेकिन पुलिस के जाने के 10-15 मिनट बाद भीड़ ने फिर से हमला बोल दिया.
उपद्रवियों ने पथराव शुरू कर दिया, जो राधे कौशल के घर तक पहुंच गया. उनके बेडरूम में बड़े-बड़े पत्थर गिरे, जिससे उनकी बुजुर्ग मां के घुटने में चोट लगी.
राधे कौशल ने बताया, "पथराव डेढ़ से दो घंटे तक लगातार चला. घर में घुसने की कोशिश की गई, कपड़े जलाकर फेंके गए, नीचे की मेडिकल शॉप और गाड़ियों को जला दिया गया. इस दौरान एक भी पुलिसकर्मी मौके पर नहीं था."
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भीड़ आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगा रही थी. धमाकों की आवाजें भी सुनाई दीं, जिससे परिवार में खौफ फैल गया. अब महू के पत्ती बाजार चौराहे पर हिंसा के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं. राधे कौशल के घर की बालकनी और बेडरूम में पत्थर बिखरे पड़े हैं. सामने के घर की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं, जबकि कई गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई. एक लाल बाइक और अन्य वाहनों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की देरी से उपद्रवी बेखौफ हो गए. राधे की मां ने कहा, "मैं सो रही थी, तभी पत्थर मेरे पैर पर लगा. डेढ़ घंटे तक हम खौफ में रहे."
गंभीर आरोप और मांग पीड़ित राधे कौशल ने आरोप लगाया कि भीड़ ने न केवल हिंसा की, बल्कि आपत्तिजनक नारे लगाकर माहौल को और भड़काया. उन्होंने कहा, "पिछले 40 सालों में ऐसा घृणित दंगा नहीं देखा. पहले भी दंगे होते थे, लेकिन अब हालात बदतर हो गए."

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