
'खुद पर शक किया, पिछले 2-3 साल ऐसा नहीं खेला...', विराट कोहली ने सुनाई धमाकेदार कमबैक की कहानी
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विराट कोहली ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में दो शतक और एक अर्धशतक जड़े. कोहली की फॉर्म ने फैन्स को 2016-17 की याद दिला दी है. ये वही दौर था, जब कोहली का करियर रफ्तार पकड़ा था और उन्होंने तीनों फॉर्मेट में रनों की बारिश की थी.
साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने जबरदस्त बैटिंग की. रांची और रायुपर वनडे में किंग कोहली ने शतकीय पारियां खेलीं. फिर वाइजैग वनडे में भी कोहली अर्धशतक जड़ने में कामयाब रहे. कोहली ने इस सीरीज में 151 की औसत से 302 रन बनाए और उन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया
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विराट कोहली ने पिछले साल टी20 इंटरनेशनल को अलविदा कह दिया था. फिर उन्होंने इस साल 12 मई को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर सबको चौंका दिया था. साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में हार के बाद कुछ फैन्स यह उम्मीद कर रहे थे कि कोहली शायद दोबारा रेड बॉल क्रिकेट में लौटेंगे, लेकिन खुद कोहली ने इन अफवाहों पर विराम लगा दिया था. देखा जाए तो एक ही फॉर्मेट पर फोकस रखना उनके लिए सही फैसला साबित हुआ है और वो फॉर्म में लौट आए हैं.
विराट कोहली ने सीरीज जीत के बाद स्वीकार किया कि वो पिछले 2-3 साल ऐसे नहीं खेल पाए थे. कोहली ने प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कहा, 'सच कहूं तो इस सीरीज में जिस तरह मैंने बल्लेबाज़ी की, वह मेरे लिए सबसे संतोषजनक बात है. मुझे नहीं लगता कि पिछले 2-3 साल में मैंने इस तरह खेला. अभी मेरा मन बहुत हल्का और आजाद महसूस कर रहा है. यह आगे बढ़ने के लिए बहुत रोमांचक है.'
स्टैंडर्ड को बरकरार रखना चाहता हूं: कोहली विराट कोहली कहते हैं, 'मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि अपने ही बनाए हुए स्टैंडर्ड को बरकरार रखूं और उस स्तर पर खेलूं, जहां मैं टीम के लिए प्रभाव छोड़ सकूं. मुझे पता है कि जब मैं मैदान पर इस तरह बल्लेबाजी करता हूं, तो इससे टीम को बहुत बड़ा फायदा मिलता है क्योंकि मैं लंबी पारी खेल सकता हूं और कंडीशन्स के अनुसार खेलने में सक्षम होता हूं. जब आपका आत्मविश्वास अच्छा होता है, तो आपको लगता है कि मैदान पर किसी भी स्थिति को संभालने की क्षमता आपके अंदर है और आप उसे टीम के पक्ष में मोड़ सकते हैं.'
विराट कोहली ने कहा, '15-16 साल तक खेलने पर ऐसे कई दौर आते हैं जब आप अपनी क्षमता पर शक करते हैं, खासकर एक बल्लेबाज़ के रूप में, जहां एक गलती आपको आउट कर सकती है. कई बार ऐसा लगता है कि शायद मैं उतना अच्छा नहीं हूं, घबराहट हावी हो जाती है. एक लंबी पारी खेलने के बाद ही आप फिर से उस जोन में आ पाते हैं, जहां आप आत्मविश्वास के साथ खेल पाते हैं. ये पूरा सफर सीखने का है, यह खुद को बेहतर समझने और एक इंसान के तौर पर आगे बढ़ने को लेकर है. एक बल्लेबाज के रूप में मैंने अपने बारे में बहुत कुछ सीखा है. छोटी-छोटी बातें आपको एक बेहतर इंसान बनाती हैं और आपके स्वभाव को संतुलित और मजबूत करती हैं.'

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