
'खाना खाएं, पैसे अपनी मर्जी से दें...', इस फूड डिलीवरी कंपनी ने शुरू की अनोखी स्कीम!
AajTak
ग्राहकों को आकृर्षित करने के लिए ब्रिटिश फूड डिलीवरी कंपनी डिलीवरु (Deliveroo) ने 'अभी खाओ बाद में भुगतान करो' (Eat now pay later) स्कीम शुरू की है. कंपनी का कहना है कि इसके तहत ग्राहक बाद में अपनी मर्जी से पेमेंट कर सकते हैं. हालांकि, कई लोग अनोखी शुरुआत के पक्ष में नजर आए, वहीं अन्य लोगों ने ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं.
फूड डिलीवरी कंपनी डिलीवरु (Deliveroo) ने अनोखी स्कीम का ऐलान किया है. कंपनी ने 'पहले खाइए बाद में पेमेंट कीजिए' (Eat now pay later) स्कीम की शुरुआत की है. हालांकि, कंपनी के इस कदम पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई है. इस स्कीम के तहत ग्राहक अपनी मर्जी से खाने का पेमेंट बाद में कर सकते हैं.
भारत में जिस तरह फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) खासे पॉपुलर हैं, ठीक इसी तरह ब्रिटेन में डिलीवरु (Deliveroo) का नाम है. इस स्कीम के लिए कंपनी ने क्लार्ना (Klarna) नाम की फाइंनेशियल कंपनी के साथ अनुबंध किया है. जिसके तहत ग्राहक 'पहले खरीदो और बाद में पेमेंट करो' (Buy now pay later: BNPL) ऑप्शन का यूज कर सकते हैं.
हालांकि, यह स्कीम शुरू होते ही विवादों में आ गई है. कुछ लोगों ने इसे बकवास आइडिया करार दिया है. ऐसे लोगों ने कहा कि इसके परिणाम अनपेक्षित हो सकते हैं. वैसे BNPL सर्विस भारत समेत दुनिया के कई देशों में काफी पॉपुलर है. इसके तहत ग्राहकों को एक तय समय में या किश्तों में भुगतान करने का विकल्प मिलता है.
लोग ज्यादातर इसका उपयोग कपड़े, आवश्यक चीजें खरीदने में करते हैं. हालांकि, सुविधा के साथ इसमें रिस्क भी है. आलोचकों का कहना है कि इससे लोग ज्यादा उधार (ऋण) लेंगे. वहीं लोगों में 'अनहेल्दी ईटिंग' की आदत बढ़ेगी.
पेमेंट से संबंधित दिक्कत हुई तो क्या करेंगे
इस स्कीम की ट्विटर पर भी लोगों ने आलोचना की है. कई लोगों ने BNPL कंपनियों के रेग्युलेशन पर ही सवाल उठाए. लोगों ने कहा कि ये कंपनियां रेगुलेटेड नहीं हैं, ऐसे में ग्राहकों के पास भी कानूनी तौर पर कोई सुरक्षा नहीं है. अगर पेमेंट से संबंधित कोई इशू हुआ तो ग्राहक क्या करेंगे?

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.









