
'क्लास, बैग में बम रखे हैं... तुम्हारे पापों की सजा जरूर मिलेगी!' दिल्ली के स्कूलों को फिर मिली धमकी
AajTak
दिल्ली स्थित दो स्कूलों को फिर धमकी भरा मेल आया है. इस मेल में स्कूलों में खून-खराबा करने की धमकी दी गई है, साथ ही रोडकिल और बेंजी का नाम लिया गया है. मेल में लिखा है कि इस खून खराबे के लिए रोडकिल और बेंजी ही जिम्मेदार होंगे. पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है.
Delhi School Bomb Threat: दिल्ली के स्कूलों को फिर धमकी भरा मेल आया है. मेल में बताया गया है कि छात्रों के बैग में बम रखे हुए हैं और यह धमकी रोडकिल और बेंजी के द्वारा भेजी गई है. इस खून खराबे के लिए रोडकिल और बेंजी ही जिम्मेदार होंगे. "रोडकिल" और "बेंजी" ये दोनों नाम आमतौर पर फिक्शन, वेब सीरीज, गेम्स या सोशल मीडिया संदर्भों में देखने को मिलते हैं. धमकी के बाद दिल्ली पुलिस और बम निरोधक दस्ते सतर्क हो गए हैं.
धमकी भरे मेल में क्या लिखा है?
मेल में लिखा गया है कि, 'क्लासरूम्स में रखे बच्चों के बैग्स में एक्सप्लोसिव्स रखे गए हैं. ये काफी सीरियस है. तुम्हे तुम्हारे कर्मों की सजा मिलेगी. रोडकिल और बेंजी इस खून-खराबे के लिए जिम्मेदार होंगे. हमारे नाम मीडिया के सामने रिलीज करो.' धमकी भरा यह ई-मेल दिल्ली के लक्ष्मण पब्लिक स्कूल और सरदार पटेल विद्यालय को आया है.
रोडकिल (Roadkill) और बेंजी (Benji) क्या है?
Roadkill एक ब्रिटिश राजनीतिक थ्रिलर टीवी सीरीज है. कुछ इलाकों या ऑनलाइन गेमिंग में "Roadkill" एक कोड नेम या निकनेम हो सकता है. इसके अलावा रोडकिल से तात्पर्य सड़क या राजमार्ग पर किसी वाहन की चपेट में आकर मारे गए पशु के शव से भी हो सकता है. अगरकोई भी पशु है जो सड़क पर किसी वाहन की टक्कर से मर जाता है, तो इसे रोडकिल कहा जाता है.
वहीं, Benji एक फेमस डॉग करैक्टर है जो 1970s की हॉलीवुड फिल्मों में था. इस फिल्म में डॉग द्वारा रेस्क्यू करने की कहानी है. इस फिल्म में एक भाई और बहन कुछ बदमाशों से जुड़े गंभीर खतरे में पड़ जाते हैं, लेकिन एक डॉग उन्हें बचा लेता है. Benji भी एक स्लैंग या कोड नेम की तरह प्रयोग हो सकता है, जैसे किसी लोकल गैंगस्टर, रैपर या यूट्यूबर के लिए.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












