
क्यों कहा जाता है कि जब पिज्जा ज्यादा बिकता है तो दो देशों में होता है युद्ध? ऐसा क्यों
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पिछले कुछ हफ्तों में जैसे-जैसे इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, सोशल मीडिया पर एक पुराना और अजीबो-गरीब 'Pizza Index' फिर से चर्चा में आ गया है. ये कोई नई फूड ट्रेंड की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा थ्योरी है जो दावा करता है कि पेंटागन के पास जब पिज्जा ऑर्डर अचानक बढ़ते हैं, तो कोई बड़ा सैन्य एक्शन होने वाला होता है.
पिछले कुछ हफ्तों में जैसे-जैसे इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, सोशल मीडिया पर एक पुराना और अजीबो-गरीब 'Pizza Index' फिर से चर्चा में आ गया है. ये कोई नई फूड ट्रेंड की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा थ्योरी है जो दावा करता है कि पेंटागन के पास जब पिज्जा ऑर्डर अचानक बढ़ते हैं, तो कोई बड़ा सैन्य एक्शन होने वाला होता है.
ये थ्योरी एक गुमनाम X अकाउंट द्वारा फैलाई गई है, जिसके मुताबिक अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के पास स्थित तीन रेस्त्रां में अचानक पिज्जा ऑर्डर की बाढ़ आ गई थी.ठीक उसी वक्त जब इजरायल ने ईरान पर अपना ताजा एयरस्ट्राइक शुरू किया.
एक पोस्ट में लिखा था कि पेंटागन के पास मौजूद सभी पिज्जा आउटलेट्स में अचानक जबरदस्त हलचल देखी गई है. एक अन्य पोस्ट के मुताबिक, District Pizza Palace, जो बंद होने ही वाला था, वहां भी अचानक भीड़ बढ़ गई. यहां तक कि व्हाइट हाउस के पास मौजूद Domino’s में भी रोज के मुकाबले ज्यादा ट्रेफिक देखा गया.
क्या ये सिर्फ इत्तेफाक था?
Pizza Index के समर्थकों का दावा है कि इसके पीछे ऐतिहासिक उदाहरण भी हैं. 1990 में जब सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला किया था, उससे ठीक एक रात पहले वॉशिंगटन डी.सी. में पिज्जा ऑर्डर तेजी से बढ़े थे. Domino’s के मालिक फ्रैंक मीक्स ने 1991 में ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म से पहले भी ऐसा ही ट्रेंड नोट किया था.
इस थ्योरी के पीछे तर्क बेहद साधारण है- जब कोई बड़ा फैसला लिया जाना होता है, तो पेंटागन के अफसर अपने डेस्क नहीं छोड़ते. वॉर रूम एक्टिव हो जाते हैं, कॉल्स लगातार चलते हैं, और ऐसे में फास्ट फूड ,खासकर पिज्जा सबसे तेज और सुविधाजनक ऑप्शन बन जाता है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












