
क्या चीन का K-Visa भारत के लिए H-1B Visa की जगह ले सकता है?
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K-वीजा चीन का नया वर्क वीजा है, जो विदेशी युवाओं को रिसर्च, पढ़ाई और बिजनेस के लिए ज्यादा सुविधाएं देता है. लेकिन अमेरिका जाने के लिए H-1B ही जरूरी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा के फीस बढ़ाने के बाद से एक बार फिर K-वीजा चर्चा में आया है. साल 1990 में H-1B वीजा की शुरुआत हुई थी और सबसे ज्यादा इस वीजा के लिए भारत के लोगों ने अप्लाई किया है. इसके बाद चीन के लोगों को सबसे ज्यादा H-1B वीजा मिला है. चीन ने भी साल 2025 के अगस्त में Science and technology में बेहतर प्रतिभाओं को अपने देश में बुलाने के लिए वीजा शुरू करने का ऐलान किया. चीन की समाचार एजेंसी Xinhua की रिपोर्ट के अनुसार, ये योजना एक अक्टूबर से शुरू होगी. तो चलिए जानते हैं क्या है K-Visa और क्या है इसकी खासियत और कौन-कौन इसके लिए अप्लाई कर सकता है.
क्या K-Visa और H-1B वीजा की जगह ले सकता है? K-Visa चीन में पेशेवरों और विदेशी कर्मचारियों के लिए जारी किया जाने वाला वर्क वीजा है. यह वीजा विशेष रूप से उच्च तकनीक, विशेषज्ञता वाले या चीन में नौकरी करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए होता है. K-Visa धारक को चीन में काम करने और रहने की अनुमति मिलती है. अगर आपको लगता है कि K-Visa और H-1B वीजा की जगह ले सकता है, तो नहीं ऐसा नहीं है. K-Visa और H1B वीजा अलग देशों के वीजा हैं. H-1B Visa यह अमेरिका में काम करने वाले पेशेवरों के लिए है. K-Visa चीन में काम करने के लिए है.
K-वीजा किसे मिलेगा? यह वीजा उन विदेशी युवाओं को मिलेगा जिन्होंने STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) विषयों में चीन या किसी बड़े विदेशी यूनिवर्सिटी/रिसर्च संस्थान से डिग्री ली हो. जो लोग टीचिंग और रिसर्च में हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने वालों को अपनी पढ़ाई और रिसर्च/काम से जुड़े डॉक्यूमेंट जमा करने होंगे.
K-वीजा की खासियत इसमें मल्टीपल एंट्री होगी, यानी आप कई बार चीन आ-जा सकेंगे. यह वीजा लंबे समय तक वैध रहेगा और ज्यादा समय तक ठहरने की सुविधा देगा. चीनी नियोक्ता का इनविटेशन लेटर जरूरी नहीं होगा. K-वीजा वाले लोग चीन में पढ़ाई, रिसर्च, संस्कृति, बिजनेस और स्टार्टअप से जुड़े काम कर सकते हैं.
H-1B से k-वीजा की तुलना H-1B अमेरिका का वर्क वीजा है, जो अमेरिका में नौकरी करने के लिए जरूरी है. K-वीजा सिर्फ चीन के लिए है, यानी अगर आप चीन में काम या पढ़ाई करना चाहते हैं तो K-वीजा ले सकते हैं. इसका मतलब है कि K-वीजा H-1B की जगह नहीं ले सकता, दोनों अलग-अलग देशों के लिए हैं. K-वीजा चीन का नया वर्क वीजा है, जो विदेशी युवाओं को रिसर्च, पढ़ाई और बिजनेस के लिए ज्यादा सुविधाएं देता है. लेकिन अमेरिका जाने के लिए H-1B ही जरूरी है.
क्यों लाया गया K-वीजा? यह चीन की बड़ी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है.पिछले कुछ सालों में चीन ने विदेशियों के लिए वीजा नियम आसान किए हैं. अब 55 देशों के लोगों को चीन में 240 घंटे (10 दिन) तक वीजा-फ्री ट्रांजिट की सुविधा है. चीन 75 देशों के साथ वीजा-फ्री समझौते कर चुका है. 2025 की पहली छमाही में 3.8 करोड़ विदेशी चीन गए, जिनमें से 1.36 करोड़ लोग वीज-फ्री एंट्री से आए.आसान शब्दों में कहे तो K-वीजा चीन का नया कदम है ताकि ज्यादा से ज्यादा विदेशी लोग पढ़ाई, रिसर्च और बिजनेस के लिए वहां जा सके.

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