
कोहली में रनों की भूख फिर नजर आने लगी... रांची में दिखा किंग का 9 साल पुराना 'विराट' अवतार
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विराट कोहली ने रांची वनडे में शतक जमाकर ये बता दिया है कि वो अभी रुकने वाले नहीं हैं. कोहली में रनों की भूख अब भी बरकरार है और उन्होंने मैच के बाद इसे लेकर हामी भी भरी. कोहली यदि अपनी फिटनेस और फॉर्म को बरकरार रख पाए, तो जरूर वो 2027 के वनडे वर्ल्ड कप में खेलेंगे.
बाउंड्री के साथ खाता खोलना, छक्का लगाकर अर्धशतक और फिर बैकवर्ड प्वाइंट के बाईं तरफ चौका जड़कर शतक... साउथ अफ्रीका के खिलाफ रविवार (30 नवंबर) को रांची वनडे में विराट कोहली ने कुछ इस कदर बल्लेबाजी की. किंग कोहली अरसे बाद भारत के लिए अपने घर में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलन उतरे थे और उन्होंने हजारों की तादाद में मैच देखने आए फैन्स को अपनी बैटिंग से मंत्रमुग्ध कर दिया. कोहली ने 120 गेंदों का सामना करते हुए 135 रन बनाए. कोहली ने अपनी यादगार शतकीय पारी में 11 चौके और सात छक्के जड़े.
जब भारतीय टीम ने चौथे ओवर में यशस्वी जायसवाल का विकेट गंवाया, तो कोहली क्रीज पर उतरे. कोहली शुरुआत में यदि कुछ गेंदें खेल जाते हैं, तो उनके लिए रन बनाना आसान हो जाता है. अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ऐसा ही देखने को मिला था, जहां कोहली शुरुआती दो मैचों में खाता तक नहीं खोल पाए थे, लेकिन सिडनी वनडे में जैसे ही उन्होंने अपनी आंखें जमाईं, फिर रन निकलने शुरू हो गए थे. एक तरह से सिडनी में खेली गई अपनी 74* रनों की इनिंग्स से प्रेरणा लेकर कोहली रांची में उतरे थे. शुरुआती 18 गेंदों पर कोहली ने 12 रन स्कोर किए थे, लेकिन नांद्र बर्गर के खिलाफ मिडऑफ के ऊपर से छक्का जड़ने के बाद तो उनकी गाड़ी सरपट दौड़ने लगी.
कोहली फिर रुके नहीं और छक्के-चौकों की बरसात करते हुए आसनी से 50 के आंकड़े के पार पहुंच गए. कोहली को इस दौरान रोहित शर्मा का बखूबी साथ मिला और दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 136 रनों की साझेदारी हुई, जिसने बड़े स्कोर का आधार तैयार किया. कोहली एक समय 100 से कम गेंदों में शतक जड़ने की स्थिति में थे, लेकिन मिडिल ऑर्डर में ऋतुराज गायकवाड़ और वॉशिंगटन सुंदर के आउट होने के चलते कोहली ने अपनी इनिंग्स को थोड़ा स्लो किया.
कोहली ने जैसे ही 102 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया, वो खुलकर खेलने लगे. एक समय तो ऐसा लग रहा था कि कोहली इस मुकाबले में 200 रन भी बना सकते हैं, लेकिन वो उससे 65 रन पीछे रह गए. कोहली जब आउट हुए थे, उस समय भारतीय पारी में 42.5 ओवर्स ही हुए थे. कोहली तेज गेंदबाज नांद्रे बर्गर की गेंद पर एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से फ्लैट बैटेड शॉट खेलने की कोशिश में रयान रिकेल्टन के हाथों लपके गए.
37 साल के विराट कोहली दोहरा शतक तो नहीं बना पाए, लेकिन उन्होंने अपना पुराना दमदार अंदाज फिर दिखा दिया. कोहली की बल्लेबाजी में वही भूख, इच्छा शक्ति और कंट्रोल नजर आया, जिसने उन्हें ‘किंग कोहली’ बनाया था. शुरुआत में पारी को थामना और बाद में आसानी से गियर बदलना, कोहली ने लगभग वही पुराना ब्लूप्रिंट रांची में अपनाया.
कोहली की बैटिंग ने तो हमें 2016-17 की याद दिला दी. ये दो साल ऐसे रहे थे, जिसमें कोहली का करियर सरपट भागा था. कोहली ने साल 2016 में 10 ओडीआई मैचों में 92.37 की औसत से 739 रन बना दिए थे, जबकि टेस्ट मैचों में उनके बल्ले से 1215 (75.93 एवरेज) और टी20 इंटरनेशनल में 641 रन (106.83 औसत) निकले थे. वहीं 2017 में कोहली ने वनडे इंटरनेशनल में 76.84 की औसत से 1460 रन कूटे थे, साथ ही टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 75.64 के एवरेज से 1059 रन स्कोर किए थे.

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