
कोटला की जिस पिच पर सीखी क्रिकेट की ABCD, अब उसी पर गौतम गंभीर ने उठाए सवाल, बोले-टेस्ट क्रिकेट को जिंदा रखने के लिए...
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वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में जीत के बावजूद भारतीय टीम प्रबंधन को कोटला की पिच रास नहीं आई. मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कहा कि पिच में न तो तेज गेंदबाजों के लिए उछाल था, न स्पिनरों को मदद मिली, उन्होंने माना कि टेस्ट क्रिकेट को जीवित रखने के लिए पिचों पर गंभीरता से काम करना होगा.
दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम (फिरोजशाह कोटला) में भारत ने भले ही वेस्टइंडीज को दूसरे टेस्ट में 7 विकेट से हराकर सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली, लेकिन टीम प्रबंधन जीत के बावजूद संतुष्ट नहीं दिखा. मुख्य कोच गौतम गंभीर ने मैच के बाद साफ कहा कि ऐसी पिचें टेस्ट क्रिकेट के लिए खतरे की घंटी हैं, क्योंकि यहां न तो तेज गेंदबाजो को मदद मिली और न ही स्पिनरों को. ध्यान रहे गौतम गंभीर ने घरेलू क्रिकेट में दिल्ली की टीम का प्रतिनिधित्व किया और इस मैदान पर उन्होंने खूब रन बरसाए.
‘बल्ले का किनारा लेने के बाद गेंद स्लिप तक जानी चाहिए’
गंभीर ने पिच की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा, 'हमें यहां बेहतर सतह मिल सकती थी. 5वें दिन जाकर परिणाम मिला, लेकिन शुरुआत से ही गेंदबाजों को कोई मदद नहीं थी. गेंद बल्ले का किनारा लेने के बावजूद स्लिप या विकेटकीपर तक नहीं पहुंच रही थी. टेस्ट क्रिकेट तभी रोमांचक बनता है जब गेंद और बल्ले के बीच मुकाबला बराबरी का हो.'
...तेज गेंदबाजों के बिना टेस्ट अधूरा
भारतीय टीम प्रबंधन चाहता है कि नवंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता और गुवाहाटी में होने वाली टेस्ट सीरीज में ऐसी पिचें तैयार हों जो जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे तेज गेंदबाजों को अपनी धार दिखाने का मौका दें. गंभीर ने कहा, 'हम हमेशा स्पिनरों की भूमिका पर बात करते हैं, लेकिन हमारे पास बुमराह और सिराज जैसे दो वर्ल्ड-क्लास पेसर हैं. टेस्ट जीतने के लिए उनका योगदान उतना ही अहम है जितना स्पिनरों का.'
स्पिनरों को भी नहीं मिली मदद

टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती को लेकर आगाह किया है. उनका मानना है कि ओस के कारण स्पिन और तेज गेंदबाजी के संतुलन को लेकर टीम मैनेजमेंट को मुश्किल फैसले लेने पड़ेंगे. कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती को एक साथ खिलाना या नहीं, यही भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल होगा.












