
कुर्सी बचाने के लिए भारत को बना रहे 'दुश्मन'! पीएम ट्रूडो कनाडा में ही घिरे
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भारत पर विदेशी हस्तक्षेप का बेतुका आरोप लगाने वाले कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने ही घर में घिर गए हैं. विपक्षी पार्टी जहां उन पर चीनी प्रभाव में होने का आरोप लगा रही हैं, वहीं ट्रूडो की खुद की पार्टी कह रही है कि अब उनके जाने का समय आ गया है.
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत पर आरोप लगाने वाले कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ट्रूडो अपने ही देश में बुरी तरह घिर गए हैं. कनाडा की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के प्रमुख पियरे पोलीवरे ने ट्रूडो पर झूठ बोलने और चीन की मदद से दो चुनाव जीतने का आरोप लगाया है. पोलीवरे ने कहा कि ट्रूडो ने कनाडा के आंतरिक मामलों में भारत को लेकर जो दावे किए हैं, वो भ्रामक हैं.
इससे पहले ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ सांसदों का संबंध विदेशी शक्तियों से है. इसे लेकर पोलीवरे ने कहा कि उनकी मांग के बावजूद ट्रूडो ने उन सांसदों का नाम जारी नहीं किया है जिन्हें लेकर उनका दावा है कि उनके संबंध विदेशी शक्तियों से हैं.
पोलीवरे ने कहा, 'जस्टिन ट्रूडो वही कर रहे हैं जो वे हमेशा करते हैं, वो झूठ बोल रहे हैं. वो अपनी नेतृत्व के खिलाफ लिबरल कॉकस के विद्रोह से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं. कॉकस ने खुलासा किया था कि उन्होंने जानबूझकर चीन को हस्तक्षेप करने दिया जिसने दो चुनाव जीतने में उनकी मदद की.'
कनाडा में अगले साल चुनाव होने हैं और इससे पहले सामने आ रही रेटिंग्स में ट्रूडो काफी पीछे चल रहे हैं. ट्रूडो के खिलाफ विपक्षी पोलीवरे को दोहरे अंकों की बढ़त हासिल है.
घरेलू विवाद से ध्यान हटाने के लिए हालिया तनाव का इस्तेमाल कर रहे ट्रूडो
कनाडा की एक अन्य विपक्षी पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ कनाडा के नेता मैक्सिम बर्नियर ने गुरुवार को कहा कि जस्टिन ट्रूडो भारत के साथ राजनयिक संकट का इस्तेमाल घरेलू विवादों से ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.






