
'काश' चूक गए मौका... डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें बनाया CIA डायरेक्टर!
AajTak
डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी जॉन रैटक्लिफ ने अपने पहले कार्यकाल के आखिरी में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के रूप में काम किया.
अमेरिका (USA) के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने नेशनल इंटेलिजेंस के पूर्व निदेशक जॉन रैटक्लिफ को सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक के रूप में चुना है. पहले, यह अनुमान लगाया जा रहा था कि भारतीय मूल के पूर्व रिपब्लिकन हाउस स्टाफर कश्यप 'काश' पटेल को CIA प्रमुख के रूप में चुना जाएगा. हालांकि, अब ट्रंप ने रैटक्लिफ को CIA का प्रमुख घोषित कर दिया है.
रैटक्लिफ, ट्रंप के करीबी सहयोगी हैं, जिन्होंने 2020 में अपने पहले कार्यकाल के अंत में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के रूप में काम किया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के पद छोड़ने से आठ महीने पहले मई 2020 में रैटक्लिफ को देश का टॉ जासूस नियुक्त किया गया था.
रैटक्लिफ के बारे में ट्रंप ने क्या कहा?
हाउस ऑफ रीप्रजेंटेटिव के पूर्व सदस्य और टेक्सास के लिए अमेरिकी अटॉर्नी, रैटक्लिफ को अपनी पुष्टि के दौरान सीनेट डेमोक्रेट से कोई समर्थन नहीं मिला. ट्रंप ने एक बयान में कहा, "क्लिंटन कैंपेन के फर्जी रूसी मिलीभगत को उजागर करने से लेकर FISA कोर्ट में FBI द्वारा नागरिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग को पकड़ने तक, जॉन रैटक्लिफ हमेशा अमेरिकी जनता के साथ सच्चाई और ईमानदारी के योद्धा रहे हैं. जब 51 खुफिया अधिकारी हंटर बाइडेन के लैपटॉप के बारे में झूठ बोल रहे थे, तो उनमें से एक जॉन रैटक्लिफ अमेरिकी लोगों को सच्चाई बता रहे थे."
उन्होंने आगे कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि जॉन हमारे देश के दोनों सबसे बड़े खुफिया पदों पर सर्विस करने वाले पहले शख्स होंगे. वह सभी अमेरिकी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के लिए एक निडर योद्धा होंगे, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के उच्चतम स्तर और शक्ति के जरिए शांति सुनिश्चित करेंगे." ट्रंप ने कहा कि 2020 में खुफिया और नेशनल सेक्योरिटी की फील्ड में विशिष्ट उपलब्धि के लिए रैटक्लिफ को नेशनल सेक्योरिटी मेडल मिलना "बहुत बड़ा सम्मान" था.
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के रूप में, रैटक्लिफ पर डेमोक्रेट और पूर्व खुफिया अधिकारियों ने ट्रंप और उनके रिपब्लिकन सहयोगियों द्वारा राजनीतिक विरोधियों पर हमला करने के लिए खुफिया जानकारी को सार्वजनिक करने का आरोप लगाया था, जिसमें राष्ट्रपति पद के लिए ट्रम्प के तत्कालीन प्रतिद्वंद्वी जो बाईडेन भी शामिल थे. रैटक्लिफ के कार्यालय ने इस आरोप का खंडन किया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.










