
ऑस्ट्रेलिया में क्यों उठा उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या का मामला?
AajTak
राजस्थान के उदयपुर और महाराष्ट्र के अमरावती में हुई हत्याओं के विरोध में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हिंदुओं ने रैली निकाली. रैली का आोयजन ऑस्ट्रेलियन हिंदू एसोसिएशन (एएचए) ने किया. मेलबर्न में हुई इस रैली में उन हिंदुओ और सिखों के पोस्टर्स के साथ प्रदर्शन किया गया, जो इन आतंक की घटनाओं में मारे गए हैं.
राजस्थान के उदयपुर और महाराष्ट्र के अमरावती में हुई हत्याओं के विरोध में हिंदुओं का एक जमावड़ा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में जुटा था. इस दौरान दर्जनों हिंदुओं ने धर्म के नाम पर हुई इन हत्याओं के विरोध और पीड़ितों के समर्थन में एक रैली निकाली.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस रैली का आोयजन ऑस्ट्रेलियन हिंदू एसोसिएशन (एएचए) ने किया था, जिसमें हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया, कश्मीरी पंडित ऑस्ट्रेलिया और ग्लोबल हिंदू एसोसिएशन फॉर रिफॉर्म एंड सस्टेनेबल सोसाइटीज जैसे ऑस्ट्रेलिया के अन्य हिंदू संगठनों ने भी हिस्सा लिया.
ऑस्ट्रेलियन हिंदू एसोसिएशन की महासचिव भारती कुंदल ने कहा, भारत में हाल में हुई कुछ घटनाओं ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय को झकझोर दिया है. हममें से कई लोगों का परिवार भारत में रहता है. लोग परेशान हैं. भारत में हमारे परिवार चिंतित हैं. यहां हम लोग इन घटनाओं में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति समर्थन दिखाना चाहते हैं. हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाएं. पीड़ितों के परिवार को न्याय दिलाएं.
भारत सरकार से पीड़ितों को न्याय दिलाने की गुहार
मेलबर्न में हुई इस रैली में उन हिंदुओं और सिखों के पोस्टर्स के साथ प्रदर्शन किया गया जो इन आतंक की घटनाओं में मारे गए हैं. इन पोस्टर्स में इन पीड़ितों के नाम और उनकी तस्वीरें भी लगी थीं.
इन पीड़ितों में कश्मीरी पंडित राहुल भट का पोस्टर भी था जिनकी मई में आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके साथ ही किशन भरवाड़ नाम के शख्स के भी पोस्टर थे जिनकी जनवरी में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हत्या कर दी गई थी. कमलेश तिवारी का पोस्टर भी था, जिनकी 2019 में लखनऊ में उसी के घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.









