
ईरान और भारत पर क्यों अचानक भड़क गए पाकिस्तानी? बोले- दुश्मन का दोस्त भी दुश्मन
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अजरबैजान और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों से तनाव की स्थिति पैदा हुई है. अजरबैजान ने ईरानी ट्रकों को टारगेट करते हुए फाइन लगाए हैं और इन ट्रकों के ड्राइवर्स को अरेस्ट किया है. वही ईरान ने अजरबैजान के साथ लगे बॉर्डर पर मिलिट्री फोर्स लगा दी है. ये मसला इतना गंभीर हो गया कि दोनों देशों के बड़े राजनेता इस मुद्दे को लेकर बयान दे रहे हैं. हालांकि अजरबैजान और ईरान के इस विवाद को लेकर पाकिस्तानी सोशल मीडिया काफी एक्टिव हो गए हैं. ये यूजर्स सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को ट्रेंड कराते हुए ईरान और भारत की आलोचना कर रहे हैं.
अजरबैजान और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों से तनाव की स्थिति पैदा हुई है. अजरबैजान ने ईरानी ट्रकों को टारगेट करते हुए जुर्माना लगाया और इन ट्रकों के ड्राइवर्स को अरेस्ट किया है. वहीं, ईरान ने भी अजरबैजान के साथ लगे बॉर्डर पर मिलिट्री फोर्स लगा दी है. ये मसला इतना गंभीर हो गया कि दोनों देशों के बड़े राजनेता इस मुद्दे को लेकर बयान दे रहे हैं. अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उन्हें ईरान के नए प्रशासन से उन्हें उम्मीद है कि इन घटनाओं को लेकर अकुंश लगेगा. हालांकि, अजरबैजान और ईरान के इस विवाद को लेकर पाकिस्तानी सोशल मीडिया काफी एक्टिव हो गए हैं. ये यूजर्स सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को ट्रेंड कराते हुए ईरान और भारत की आलोचना कर रहे हैं. अजरबैजान के अलावा, पाकिस्तानी ईरान को उसकी भारत से दोस्ती को लेकर भी निशाने पर ले रहे हैं. Unless we have #Iran Muslims don't need an enemy. Iran has always made divisions in Muslims. Interfering in middle east n had always an alloy of #India against #Pakistan. Iran has problems with almost every Muslim country. #Azerbaijan Shia #Iran was supporting Christian #Armenia against Shia #Azerbaijan. Iran is now looking for another ground for it's proxy activities, increasing enemies back to back, due to a major defeat of his dream in #Afghanistan! Interesting! The policy is & must b very clear. "Enemy of enemy is frnd and frnd of Enemy is enemy." Iran is frnd of & supporting enemy country i.e India. Jews have rights in Iran but not the Sunni Muslims. Recent history of Iran is very doubtful against Pakistan. #Azerbaijan

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








