
इलेक्ट्रीशियन का बेटा बना देश का हीरो... संघर्षों से भरी है तिलक वर्मा की कहानी
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तिलक वर्मा ने एशिया कप 2025 फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ दबाव में शानदार पारी खेलकर भारत को खिताब दिलाया. साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले तिलक के सफर में उनके कोच सलाम बायश की अहम भूमिका रही, जिन्होंने आर्थिक और व्यक्तिगत स्तर पर उनका साथ दिया.
एशिया कप फाइनल में तिलक वर्मा की पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी. पाकिस्तान के सामने दबाव की स्थिति में तिलक वर्मा एक छोर पर टिके रहे और मैच को फिनिश करके लौटे. इस ऐतिहासिक पारी के बाद तिलक वर्मा को हीरो की तरह पेश किया जा रहा है. लेकिन क्या आपको पता है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले तिलक और उनके परिवार ने क्रिकेट की ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों का सामना किया है. एक इलेक्ट्रीशियन के बेटे तिलक का प्रोफेशनल क्रिकेट खेलना तय नहीं था, लेकिन एक कोच के अटूट समर्थन ने उन्हें महानता की राह पर ला खड़ा किया. आइए जानते हैं तिलक वर्मा की कहानी...
हैदराबाद के तिलक वर्मा की कहानी
8 नवंबर 2002 को हैदराबाद में जन्मे तिलक साधारण परिवार से थे. उनके पिता नमबूरी नागराजू इलेक्ट्रीशियन थे, जबकि मां गायत्री देवी गृहिणी. बचपन से ही तिलक के लिए क्रिकेट खेल मात्र शौक नहीं, बल्कि जुनून था. उनके पिता के अनुसार, तिलक हमेशा प्लास्टिक बैट साथ रखते और रात में भी उसे अपने पास रखकर सोते.
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लेकिन आर्थिक तंगी ने क्रिकेटर बनने के सपनों पर संकट डाल दिया. यह स्थिति तब बदली जब कोच सलाम बायश ने बरकस में टेनिस बॉल मैच खेलते हुए तिलक को देखा. उनके टाइमिंग और हैंड-आई कोऑर्डिनेशन से प्रभावित होकर बायश ने पूछा कि वे अकादमी में क्यों नहीं खेल रहे. जवाब सीधा था- परिवार फीस नहीं उठा सकता.
इसके बाद बायश ने खुद जिम्मेदारी ली. उन्होंने माता-पिता को मनाया और वादा किया कि सारे खर्चे वे खुद उठाएंगे.

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