
आतंकियों को नागरिकता से बेदखल करेगा इजरायल, कैसे जीते हैं वे लोग, जिनके पास किसी भी देश की नागरिकता नहीं होती?
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Israel में हाल में नया नागरिकता कानून पास हुआ. न्यू सिटीजनशिप लॉ के मुताबिक आतंकी गतिविधियों में शामिल रह चुके लोगों से देश की नागरिकता छीन ली जाएगी. बड़ा तबका इसे ह्यूमन राइट्स के खिलाफ बता रहा है. वैसे दुनिया में बड़ी आबादी ऐसी है, जो किसी भी देश की नागरिक नहीं. न वे भारत के हैं, न पाकिस्तान और न ही अमेरिका के... क्या होता है ऐसे लोगों के साथ?
इसी 15 फरवरी को इजरायल की पार्लियामेंट में नया सिटीजनशिप लॉ लागू हुआ. ये नया कानून उन सभी लोगों की पहचान करेगा, जो टेररिस्ट गतिविधि का हिस्सा रह चुके या वर्तमान में हैं. साथ ही ऐसे लोगों को भी अलग किया जाएगा जो फिलीस्तीन के कट्टर समर्थक हैं और देखा जाएगा कि क्या वे किसी भी तरह से फिलीस्तीनी संगठनों से फंड पा रहे हैं. अगर ऐसा है तो उन लोगों की इजरायली नागरिकता छीन ली जाएगी और देश से निकाल दिया जाएगा.
क्यों किया इजरायल ने बदलाव? आतंकी हरकतों के कारण जेल में पड़े और नागरिक बतौर बाहर रह रहे, दोनों ही तरह के लोगों पर कानून लागू होगा. देश के सिटीजनशिप लॉ 1954 में बदलाव के लिए आए इस प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला. माना जा रहा है कि लंबे समय से चारों ओर युद्ध और खतरे को देखते हुए मौजूदा इजरायली सरकार ने ये फैसला किया ताकि कम से कम देश के भीतर आतंकी खत्म हो सकें. बता दें कि फिलीस्तीन सपोर्टर लगातार इजरायल के भीतर और चारों तरफ आतंक मचाए हुए हैं. हाल के दिनों में देश के भीतर आतंकी हमले बढ़े, जिसके तोड़ की तरह न्यू सिटीजनशिप लॉ आया है.
देश की लगभग 90 लाख की आबादी में करीब 20 प्रतिशत लोग मुस्लिम हैं और इनमें से ज्यादातर फिलीस्तीन सपोर्टर हैं. ऐसे लोग अब स्टेटलेस होने की कगार पर हैं.
क्या मतलब है नागरिक न होने का? एक स्टेटलेस शख्स वो है, जो न तो किसी देश के कानून के तहत आता है, और न ही जिसपर कोई देश अपना कानून लागू कर सकता है. ये एक तरह से वैसा ही है, जैसे किसी के फिंगरप्रिंट का न होना. वो अपनी लगभग पहचान खो देता है. उसे किसी देश से खास सुविधा नहीं मिलती और न ही कोई देश उसपर अपनी सजाएं ही लागू कर सकता है.
क्यों कोई अनागरिक बन जाता है? इसकी एक नहीं, कई वजहें हैं. एक बहुत कॉमन चीज है, शादी. जैसे कोई विदेशी मूल के शख्स से शादी करके उसके देश आए, और किसी वजह से उसे वहां की नेशनलिटी न मिल सके, और वो अपने देश की नागरिकता भी सरेंडर कर चुका हो. ऐसे में कुछ समय के लिए वो स्टेटलेस हो जाता है. बीच में भारत-नेपाल के बीच तनाव होने पर नेपाल ने भी कहा था कि वो भारत से आए बेटियों को नेपाली सिटिजनशिप नहीं देगा. रिफ्यूजियों की संतानें भी स्टेटलेस होने के खतरे में रहती हैं.
कई बार तकनीकी खामियां भी किसी की नागरिकता से छेड़छाड़ कर सकती हैं. जैसे कागजों में गड़बड़ी, या फिर बच्चे का जन्म के बाद रजिस्ट्रेशन न होना. सरोगेसी या फिर इंटरनेशनल अडॉप्शन में भी कई बार पेंच होने के कारण बच्चे को नागरिकता नहीं मिल पाती है.

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