
आगे कुआं, पीछे खाई! पाकिस्तान को बर्बादी से बचाने का आखिरी रास्ता इतना मुश्किल
AajTak
पाकिस्तान की माली हालत किसी से छुपी नहीं है. सऊदी अरब और यूएई से कर्ज लेने के बाद भी पाकिस्तान के ऊपर डिफॉल्ट होने का खतरा मंडरा रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पाकिस्तान को सहायता राशि देने से इनकार कर दिया है. कर्ज से पहले आईएमएफ ने पाकिस्तान को सभी निर्देशों को पूरा करने के लिए कहा है. शहबाज शरीफ इस असमंजस में हैं कि आईएमएफ की कड़वी गोली को कैसे मीठी की जाए.
आर्थिक तंगहाली झेल रहे पाकिस्तान के लिए हर एक दिन संकट भरा गुजर रहा है. पाकिस्तान की माली हालत यह है कि पाकिस्तान के पास एक महीने के आयात के लिए भी पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार नहीं है. सऊदी अरब, यूएई से कर्ज लेने के बाद भी पाकिस्तान के ऊपर डिफॉल्ट होने का खतरा मंडरा रहा है. पाकिस्तान के पास अब एक अंतिम रास्ता ही बचा है और वह है- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से आर्थिक मदद. लेकिन सऊदी अरब और यूएई की तरह आईएमएफ इतनी आसानी से पाकिस्तान को आर्थिक मदद नहीं देने वाला है. आईएमएफ की जो शर्तें हैं, उन्हें पूरा करना पाकिस्तान की सरकार के लिए बहुत ही मुश्किल है.
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से सहायता राशि के लिए कई बार अनुरोध कर चुका है. लेकिन आईएमएफ ने साफ शब्दों में पहले ही पाकिस्तान की सरकार को खर्च कम करने और अपने सरकारी खजाने को बढ़ाने की हर संभव कोशिश करने की नसीहत दे चुका है. आईएमएफ ने पाकिस्तान को हाल के दिनों में दिए गए सभी निर्देशों को पूरा करने के लिए कहा है.
आईएमएफ की शर्तें मानने से पाकिस्तान में पहले से ही चरम सीमा पार कर चुकी महंगाई और टैक्स का बोझ बढ़ेगा. जिससे शहबाज शरीफ सरकार को जनता की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है. शहबाज शरीफ इस असमंजस में हैं कि आईएमएफ की कड़वी गोली को कैसे मीठा किया जाए.
वहीं, पाकिस्तान सरकार के कुछ लोगों का कहना है कि विश्व बैंक और आईएमएफ दोनों को पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति का फायदा नहीं उठाना चाहिए.
बुरी तरह फंसी है पाकिस्तान की सरकार
पाकिस्तान के लिए जरूरी आईएमएफ के निर्देशों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक 'मिनी बजट' तैयार किया है. इस मिनी बजट के माध्यम से सरकार ने 200 अरब रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.







