
आखिर Mullah Baradar के खिलाफ क्यों खड़ा है हक्कानी ग्रुप, जानिए
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अफगानिस्तान की नई सरकार में अंदरूनी कलह को लेकर तालिबान की तरफ से बार-बार सफाई दी जा रही है. बुधवार को वीडियो बयान जारी करने से पहले सोमवार को उप-प्रधानमंत्री बरादर के गायब होने को लेकर एक व्हाट्सऐप ऑडियो संदेश जारी किया गया था. दोनों का मजमून यही है कि तालिबान में सबकुछ ठीक है. तालिबान की तरफ से अब दावा किया जा रहा है कि मुल्ला अब्दुल गनी बरादर काबुल में नहीं बल्कि कंधार में हैं जहां वो तालिबान के सुप्रीम लीडर अख़ुंदज़ादा से मुलाकात कर रहे हैं. लेकिन एक इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट ने दावा किया है कि कुछ दिनों पहले बरादर और हक़्क़ानी नेटवर्क के एक मंत्री खलील उर रहमान के बीच बहस हुई थी, बात इतनी बिगड़ी कि नौबत हाथापाई तक पहुंच गई. देखें ये रिपोर्ट.

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.









