
'अभी भी वक्त है डील कर लो...', इजरायली हमले से तड़प रहे ईरान को ट्रंप की खुली चेतावनी
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर इजरायल के हमलों को लेकर कहा कि हमें इसके बारे में पहले से जानकारी थी. मैंने ईरान को शर्म और मौत से बचाने की कोशिश की. मैंने उन्हें बचाने की कोशिश की. मैंने कोशिश की क्योंकि मुझे ईरान के साथ यह डील करनी है.
मिडिल ईस्ट इस समय बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है. इस अस्थिरता के बीच इजरायल और ईरान की जंग ने तनाव का स्तर बहुत बढ़ा दिया है. आलम ये है कि दोनों देश युद्ध के मुहाने तक पहुंच गए हैं. इस अस्थिरता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर आगाह किया है.
ट्रंप ने ईरान को चेताते हुए कहा कि अभी भी देर नहीं हुई है. ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए बातचीत की टेबल पर लौटना होगा. उन्होंने ईरान पर हुए इन हमलों को बेहद सटीक और सफल बताया.
उन्होंने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर इजरायल के हमलों को लेकर कहा कि हमें इसके बारे में पहले से जानकारी थी. मैंने ईरान को शर्म और मौत से बचाने की कोशिश की. मैंने उन्हें भरसक बचाने की कोशिश की. मैंने कोशिश की क्योंकि मुझे ईरान के साथ यह डील करनी है.
ट्रंप ने कहा कि दो महीने पहले मैंने ईरान को डील करने के लिए 60 दिनों का अल्टीमेटम दिया था. उन्हें यह डील कर लेनी चाहिए थी. आज 61वां दिन है. मैंने उन्हें बताया था कि क्या करना है. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. अब शायद उनके पास सेकंड चांस है.
उन्होंने कहा कि हम इजरायल के करीब हैं. हम अभी तक उनके नंबर वन सहयोगी हैं. मैंने ईरान के भले के लिए ही कहा कि इस डील पर बातचीत कर इस पर मुहर लगाना जरूरी है.

ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले को लेकर मचे घमासान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कल मीडिया के सामने आकर युद्ध को लेकर कई बड़ी बातें कहीं नेतन्याहू ने ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका को घसीटने की फर्जी खबरों का खंडन किया. कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमेशा वही निर्णय लेते हैं जो उन्हें अमेरिका के हित में लगता है. उन्होंने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिका के तालमेल की भी प्रशंसा की.

जिस ईरान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप निकले थे. अब लगता है कि उनका पैर उसी ईरान के 'तेल' पर फिसल गया है. और इसलिए वो एक बार फिर पूरी दुनिया को 'चौंकाने' वाला फैसला ले सकते हैं. और ये फैसला ईरान के तेल की Sale से जुड़ा है. ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने और हर चीज के लिए 'मोहताज' बनाने की कोशिश करने वाले ट्रंप अब खुद ईरान के तेल से प्रतिबंध हटा सकते हैं. और तेल की Sale करने की अनुमति दे सकते हैं? अब सवाल ये है कि जब ट्रंप खुद ईरान के तेल की बिक्री के लिए तैयार हैं, तो वो ईरान से युद्ध क्यों लड़ रहे हैं? क्या वाकई ईरान ने ट्रंप को ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया है, या ट्रंप अपने ही फैसलों की फांस में फंस चुके हैं?











