
अबॉर्शन की दवा पर बाइडेन सरकार की दलील... पढ़ें- 24 जनवरी की देश-दुनिया की 15 बड़ी खबरें
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24 जनवरी को अमेरिका, दुनिया और भारत में ये खबरें सुर्खियों में बनी रहीं. आइए डालते हैं एक नजर...
अमेरिका में बाइडेन सरकार ने अबॉर्शन की दवा पर रोक का विरोध किया है. रूस में यूक्रेन के कैदियों को ले जा रहा विमान क्रैश हो गया. वहीं, अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए एक घंटा समय बढ़ा दिया गया है. 24 जनवरी को अमेरिका, दुनिया और भारत में ये खबरें सुर्खियों में बनी रहीं. आइए डालते हैं एक नजर...
अमेरिका की 5 बड़ी खबरें...
1. न्यू हैम्पशायर में जीते ट्रंप, निक्की हेली हारीं
न्यू हैम्पशायर में हुए प्राइमरी इलेक्शन में रिपब्लिक पार्टी के राष्ट्रपति दावेदार डोनाल्ड ट्रंप जीत गए हैं. उन्हें 55 फीसदी वोट मिले हैं. जबकि, भारतीय मूल की निक्की हेली को 43 फीसदी वोटरों का ही समर्थन मिला है. न्यू हैम्पशायर में जीत के बाद ट्रंप की दावेदारी और भी मजबूत हो गई है.
2. निक्की हेली बोलीं- रेस अभी बाकी है
आयोवा के बाद न्यू हैम्पशायर में भी निक्की हेली हार गईं हैं. हालांकि, अब भी वो ट्रंप को चुनौती दे रहीं हैं. हार के बाद उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, रेस अभी खत्म नहीं हुई है. अभी दर्जनों राज्य बाकी हैं. और मेरा अगला पड़ाव साउथ कैरोलिना है.

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.








