
अचानक DDA की वेबसाइट डाउन... फिर फ्लैट्स Sold Out, लोगों ने कहा- ये स्कैम है!
AajTak
लोगों की शिकायत है कि इसके पीछे कोई साजिश है, जिस वजह अचानक वेबसाइट डाउन हो गई और आम आदमी अब ठगा महसूस कर रहा है, क्योंकि कुछ घंटे के बाद वेबसाइट पर सभी फ्लैट्स Sold Out दिखने लगे.
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की जन साधारण आवास योजना 2025 के तहत दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्थित कुल 1172 फ्लैट्स के लिए 22 सितंबर को दोपहर 12 बजे से बुकिंग शुरू होनी थी. जिन लोगों प्लैट के लिए आवेदन किए थे, सभी दिल्ली में आशियाने की उम्मीद लेकर बुकिंग को तैयार थे. क्योंकि फ्लैट्स का आवंटन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होना था.
लेकिन अब तमाम आवदेकों की शिकायत है कि दोपहर 12 बजे से बुकिंग शुरू होनी थी, उससे पहले 11.50 बजे से ही वेबसाइट डाउन हो गई. सर्वर डाउन होते ही डीडीए के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया तो बताया कि टेक्निकल इश्यू है, उसे सही किया जा रहा है. हालांकि DDA ने अपनी वेबसाइट पर इसकी जानकारी दी है कि काफी ट्रैफिक की वजह से वेबसाइट स्लो हो गई थी, जिससे कुछ लोगों को दिक्कतें आईं.
बुकिंग में दिक्कतों से लोग परेशान
इस बीच दिल्ली के नांगलोई इलाके के रहने वाले हर्ष ने बताया कि उन्होंने 2 फ्लैट्स के लिए रजिस्ट्रेशन किया था, जिसका आवेदन शुल्क 5000 रुपये दिया था. आज 22 सितंबर को जब फ्लैट की बुकिंग करनी थी, तो साइट ही नहीं खुली. 12 बजे से 3 बजे तक वेबसाइट डाउन रही और बीच में एक-दो बार पेज खुला तो कैप्चा ही अपलोड नहीं हुआ.
वहीं, जामिया नगर इलाके के जीशान ने बताया कि उन्होंने द्वारका सेक्टर 14 में DDA फ्लैट के लिए अप्लाई किया था. जब बुकिंग करने बैठे तो कई बार ट्राई करने के बाद स्लो साइट खुली और स्क्रीन पर कैप्चा और अन्य अप्लाई ऑप्शन ही नहीं दिखाई दिए. वहीं, गोविंदपुरी इलाके के रहने वाले सत्यपाल यादव ने भी यही जानकारी दी.
लोगों की शिकायत है कि इसके पीछे कोई साजिश है, जिस वजह अचानक वेबसाइट डाउन हो गई और आम आदमी अब ठगा महसूस कर रहा है, क्योंकि कुछ घंटे के बाद वेबसाइट पर सभी फ्लैट्स Sold Out दिखने लगे. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लोग DDA को टैग कर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












