
West Bengal Violence: सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को भेजा नोटिस, मांगा यह जवाब
Zee News
मगरिबी बंगाल असेम्बली इंतखाब के बाद बीजेपी के जरिए ये इल्जाम आयद किए गए थे कि तृणमूल के कारकून के डर से बड़ी तादाद में भाजपा के वोटर और हिमायत बंगाल से असम भागने को मजबूर हुए हैं.
नई दिल्ली. मगरिबी बंगाल में असेम्बली इंतखाबात के बाद रियासत में मुबैयना तौर पर होने वाली तशददुद और सियासी बदले की कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में मंगल को सुप्रीम कोर्ट ने एक अपील पर समाअत करते हुए मगरिबी बंगाल हुकूमत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में मगरिबी बंगाल में सियासी झगड़े की वजह से 1 लाख से ज्यादा लोगों के हिजरत कर पड़ोसी रियासत असम में पनाह लेने की बात कही गई है. अपील में बंगाल छोड़कर असम जाने को मजबूर होने वाले रियासत के आम शहरियों के वापसी के लिए आयोग बनाने का भी मुतालबा किया गया है। साथ ही इस पूरे मामले की तहकीकात स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से कराने और रियासत छोड़कर जाने वाले खौफजदा अवाम को तहफ्फुज देने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विनीत सरण और बीआर गवई की बेंच ने समाजी कारकुन अरुण मुखर्जी और चार दीगर अफराद की अपील पर यह नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की अगली समाअत 7 जून को होगी. गौरतलब है कि मगरिबी बंगाल में असेम्बली इंतखाबात के बाद मुसलसल हिंसा की शिकायतें मिल रही है. बीजेपी और बीजेपी के हिमायती लोगों के साथ लगातार मारपीट करने, उनके दुकान और मकान लूटने और यहां तक कि उनका कत्ल करने के इल्जाम भी टीएमसी के कारकून पर लगते रहे हैं. इस मामले में बंगाल के गर्वनर को भी मेमोरेंडम देकर दखल देने की मांग की गई थी. कई आईनी इदारों को भी बनाया गया पार्टी कोर्ट ने इस मामले में नेशनल कमिशन फॉर एससी, एसटी और नेशनल कमिशन फॉर वुमेन को भी पार्टी बनाया है। वरिष्ठ वकील पिंकी आनंद ने अपील दायर करने वालों की तरफ से कोर्ट में कहा कि मानवाधिकार संगठनों को इस केस में पार्टी इसलिए बनाया जाना चाहिए क्योंकि हिंसा की वजह से औरतों, बच्चों ने जो परेशानियां झेली हैं, उनपर इन संगठनों ने रिपोर्ट तैयार की हैं। कोर्ट ने यह अपील मान ली और इन इदारों को भी पार्टी बना दिया है.
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