
Remote Voting Project: बिना वोटिंग सेंटर जाए कहीं भी डाल सकेंगे वोट, Election Commission कर रहा है इस परियोजना पर काम
Zee News
कुछ सालों बाद आप बिना वोटिंग सेंटर जाए कहीं से भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में वोट डाल सकेंगे. चुनाव आयोग इस बड़ी परियोजना पर रात-दिन काम कर रहा है.
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा ने कहा कि दूरस्थ मतदान की अवधारणा पर काम कर रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अवधारणा 2024 के लोकसभा चुनाव (General Election 2024) तक मूर्त रूप लेगी. अरोड़ा ने साथ ही कहा कि इस परियोजना का ट्रायल अगले दो-तीन महीने में शुरू हो सकता है. सुनील अरोड़ा (Sunil Arora) ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि चुनाव आयोग ने इस साल की शुरुआत में आईआईटी मद्रास, अन्य आईआईटी और दूसरे प्रमुख संस्थानों के प्रतिष्ठित विद्वानों के साथ विचार विमर्श करके घर बैठे मतदान करने वाली परियोजना पर काम शुरू किया है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से आयोग की एक समर्पित टीम इस परियोजना को आकार देने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यह अवधारणा 2024 के लोकसभा चुनावों तक मूर्त रूप लेगी.
Indian France Rafale deal: फ्रांस से खरीदे जाने वाले 114 राफेल की मंजूरी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मिल गई है. जिससे यह डील अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC की बैठक में डील पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जाएगी. अंतिम हस्तारक्षर इस डील पर पीएम मोदी करेंगे.

India Nuclear Powered Submarine: साल 2040 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी ऑपरेटर बन सकता है. इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा. दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर सबमरीन अमेरिका के पास हैं. इनकी संख्या 60 से 70 के बीच है.

DRDO hypersonic missile: भारतीय नौसेना एक बेहद लंबी दूरी वाली, हवा से लॉन्च होने वाली 'एंटी-शिप बैलिस्टिक' मिसाइल हासिल करने की योजना बना रही है. यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही उनके जहाजों को समंदर की गहराइयों में भेज सकेंगे.

30MM Naval Gun Indian Navy: यह गन सिस्टम भारत फोर्ज के आर्टिलरी सेक्टर में अनुभव पर आधारित है. कंपनी पहले ही 30×173 मिमी NATO स्टैंडर्ड कैलिबर पर आधारित मॉड्यूलर टर्रेट्स विकसित कर चुकी है. इनका इस्तेमाल इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स में होता है. यही कैलिबर समुद्री नजदीकी लड़ाई (Close-Range Engagement) के लिए भी प्रभावी माना जाता है.









