
Prithvi Shaw: 'बुरी संगत में पड़ गया था, ऋषभ पंत ने किया सपोर्ट...', टीम इंडिया से बाहर चल रहे पृथ्वी शॉ का छलका दर्द
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पृथ्वी शॉ ने कहा है कि जब वो करियर में बुरे दौर से गुजर रहे थे, तब सिर्फ ऋषभ पंत ने उनका साथ दिया. पृथ्वी शॉ की तुलना कभी सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और ब्रायन लारा से की जाती थी, लेकिन वो उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए.
स्टार क्रिकेटर पृथ्वी शॉ काफी समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं. पृथ्वी शॉ ने जुलाई 2021 में भारतीय टीम के लिए आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला खेला था. आगे चलकर उनकी मुंबई की रणजी टीम से भी छुट्टी हो गई. वहीं मेगा ऑक्शन में अनसोल्ड होने के कारण पृथ्वी शॉ इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 का भी हिस्सा नहीं बन पाए.
ऋषभ पंत के सपोर्ट को किया याद
अब पृथ्वी शॉ ने खुलासा किया है कि जब वो करियर में बुरे दौर से गुजर रहे थे, तब सिर्फ ऋषभ पंत ही ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने उनका साथ दिया. पृथ्वी शॉ की तुलना कभी सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और ब्रायन लारा से की जाती थी, लेकिन वह उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए. पृथ्वी शॉ ने न्यूज 24 से कहा, 'जब भी उन्हें (ऋषभ पंत) लगता है कि कुछ गलत हो रहा है, तो वह मुझसे संपर्क करते हैं.'
पृथ्वी शॉ ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई गलत फैसले लिए और क्रिकेट को कम समय देना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा, 'मैंने जीवन में कई गलत फैसले लिए हैं. मैंने क्रिकेट को कम समय देना शुरू कर दिया. मैं पहले बहुत अभ्यास करता था. नेट्स में 3-4 घंटे बल्लेबाजी करता था. मुझे थकावट महसूस नहीं होती थी. मैं आधा दिन मैदान पर बिताता था, लेकिन धीरे-धीरे मेरा ध्यान भटकने लगा.'
'मैंने गलत दोस्त बनाए...',
पृथ्वी शॉ ने यह भी बताया कि वह बुरी संगत में पड़ गए थे, जिसकी वजह से उनका ध्यान इस खेल से हट गया. पृथ्वी शॉ ने कहा, 'जो जरूरी नहीं था, उसे भी जरूरी मानना शुरू कर दिया. मैंने गलत दोस्तों से दोस्ती कर ली क्योंकि मैं उस समय टॉप पर था. फिर दोस्ती बनती गई और वे मुझे इधर-उधर ले जाने लगे. उसके बाद मैं ट्रैक से भटक गया. मैं पहले ग्राउंड पर 8 घंटे प्रैक्टिस करता था, अब 4 घंटे ही अभ्यास करता हूं.'

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












